भाभी की सास को बनाया पर्सनल रखेल – Saas ki Chudai Ki Kahani

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Saas ki Chudai

दोस्तो मैं एक एनिमेशन का स्टूडेंट हूँ।आज मैं तुम्हें अपनी पड़ोस की भाभी रोजी जी की सास के साथ हुई सेक्स की कहानी सुनाने वाला हूँ।

ये Saas ki Chudai ki Kahani 100% सच्ची है, इसमें कुछ भी झूठा या काल्पनिक नहीं है।

मैंने जो कुछ भी लिखा है, वो सब वैसा ही हुआ है।

बात उस वक्त की है जब छुट्टियों में मैं अपने घर मेले में गया था, अपने फ़ैमिली के साथ।

वो मेला बड़ा वाला था, जहाँ दूर-दूर से लोग आते थे।

उसी में मेरी पड़ोस की भाभी रोजी जी और उनकी सास भी आई थीं।

रोजी जी की सास का नाम प्रभा था, लेकिन मैं उन्हें प्रभा आंटी कहकर बुलाता था।

प्रभा आंटी विधवा हो गई थीं, उनके पति गुजर चुके थे।

रोजी जी और उनके पति ने उन्हें अपने साथ रख लिया था, ताकि वो घर पर अकेली न रहें।

प्रभा आंटी देखने में कमाल की माल लगती थीं।

उनका फिगर तो ऐसा था कि कोई भी जवान लड़का देखकर पागल हो जाए।

उनकी उम्र करीब 45 साल की होगी, लेकिन जिस्म एकदम टाइट और सेक्सी था।

चूचियां 36 साइज की, इतनी कड़क और उभरी हुई कि ब्लाउज से बाहर निकलने को बेताब रहतीं।

कमर 28 इंच की पतली, लेकिन गांड 38 इंच की मोटी और गोल-मटोल, चलते वक्त मतलब ऐसे हिलती कि लन्ड सलामी देने लगे।

गोरी-चिट्टी स्किन, लंबे बाल, और आंखें ऐसी कि हवस भरी नजरों से देखतीं तो दिल धड़क जाता।

उनकी गांड की वो उठान, भाई, वो तो कमाल थी – जैसे दो बड़े-बड़े तरबूज एक साथ चिपके हों।

चूचियां इतनी नर्म जो दबाने पर भी वापस उछल आतीं।

मैं तो पहली नजर में ही उनका दीवाना हो गया था।

उस दिन सब लोग मौसी के घर के पास में मेला देखने गए थे।

मैं भी परिवार के साथ था।

प्रभा आंटी रोजी जी के साथ आई थीं।

जैसे ही मैंने उन्हें देखा, मेरा लन्ड खड़ा होने लगा।

वो साड़ी पहने हुई थीं, जो उनकी बॉडी पर चिपकी हुई थी।

उनकी गांड की शेप साफ दिख रही थी, और चूचियां ब्लाउज में कैद होकर उभर रही थीं।

मैंने सोचा, ये तो काँटा माल है, भाई।

वो मुझसे बात करने लगीं, “आकाश बेटा, कैसा है तू?

कॉलेज कैसा चल रहा है?”

उनकी आवाज में वो देसी मिठास थी जो में हमेशा से पसंद करता हूं, लेकिन उनकी नजरें मेरे लन्ड पर टिक गईं, क्योंकि वो हरकत कर रहा था।

मैं सकपका गया, हाथ से लन्ड को ठीक करने लगा, लेकिन वो कुत्ते की तरह खड़ा होकर गुर्राने लगा।

मैंने कहा, “आंटी, एक मिनट में आता हूँ,” और भागकर बाथरूम में चला गया।

वहाँ लन्ड निकाला और प्रभा आंटी की चूचियों और गांड को याद करके जोर-जोर से हिलाने लगा।

आह… प्रभा आंटी की गांड… उफ्फ… वो चूचियां…” कहते हुए मैंने रस फेंक दिया फिर चैन मिला तो बाहर आया।

बाहर देखा तो वो किसी और से बात कर रही थीं।

शाम को हम सब मेला देखने साथ गए।

घूमते-घूमते जब थक गया तो मैं रात को खाना खाकर सोने चला गया।

मौसी के घर में मेहमान ज्यादा थे, सोने की जगह कम पड़ रही थी।

प्रभा आंटी ने मुझे अपने पास बुलाया और बोली, “आकाश, इधर आकर सो जा बेटा।”

मैं उनके पास लेट गया।

लेकिन नींद कहाँ आनी थी?

उनकी हलकट जवानी याद करके लन्ड फिर से तन गया।

मुझे पैर फैलाकर सोने की आदत है, सो नींद नहीं आ रही थी।

रात में प्रभा आंटी ने चादर ओढ़ रखी थी, जो थोड़ी ऊपर हो गई।

गलती से मेरी जांघ उनकी चादर के अंदर चली गई और उनकी टांगों के बीच जाकर उनकी गांड को छूने लगी।

मुझे हल्की नींद आ रही थी, तो अहसास नहीं हुआ।

तभी वो हिलीं और मैं जाग गया।

पता चला मेरी जांघ उनकी नंगी टांगों के बीच है जो गांड को लग रही है।

उनकी गर्मी महसूस करके मुझे मजा आने लगा।

कमरा अंधेरा था, सो मैंने जांघ वैसे ही रखी।

उनकी गांड में हलचल हुई जिससे समझ आया वो जाग रही हैं।

अब मैंने जानबूझकर जांघ को और अंदर धकेला।

वो गांड हिलाकर सिग्नल दे रही थीं – “आहआह… उफ्फ…”उनकी हल्की आवाज़ मेरे कानो में आई।

मैंने उनके कमर पर हाथ रखा और जांघ से गांड घिसने लगा।

वो सिसकारियां लेने लगीं, “आह… आह… आकाश…” उनकी आवाज धीमी थी, लेकिन कामुक थी।

मेरा लन्ड कड़क हो गया।

मैं उनकी चादर में घुस गया और हाथ चलाने लगा।

पहले मैने मम्मों पर हाथ रखा, जब उनका कोई विरोध नहीं हुआ।

फिर मैने उनकी एक चूची दबाई, वो “उम्म्ह… आह…” करके सिसकारीं लेने लगी।

मैंने आगे बढ़कर ब्लाउज के बटन खोले, दो बटन खुले, वो कुछ नहीं बोलीं।

फिर मैने हाथ अंदर डाला, मम्मों को मसलने लगा।

उनकी सांसें तेज हो गईं, “हा.. आह्ह्य. हा… आह…” मैंने उनकी साड़ी ऊपर की, देखा तो पैंटी नहीं पहनी थी।

चूत भी गीली थी।

मैंने दो उंगलियां चूत में घुसेड़ीं, “आह… उफ्फ… आकाश… धीरे…” वो मोअन करने लगीं।

मैं गर्दन चूमने लगा, चाटने लगा।

वो मस्त हो गईं वो बिल्कुल मना नहीं कर रही थीं।

साफ था, वो चुदने को तैयार हैं।

मैं चूत में उंगलियां रगड़ने लगा, उनके दाने को मसलने लगा।

साथ ही लन्ड उनकी गांड पर लगाया।

प्रभा आंटी ने हाथ पीछे किया और मेरा लन्ड पकड़ा और गांड पर घिसवाने लगीं, “आह… कितना मोटा है… उफ्फ…” लन्ड ने छेद महसूस किया, मैंने जोर से धकेला।

वो “आह.. अआआह आह… मर गई…” चिल्लाईं।

आवाज तेज हुई तो मैंने मुंह दबाया और जोर-जोर से गांड मारने लगा।

वो गांड हिलाकर मेरा 7 इंच का लौड़ा ले रही थीं, “उम्म्ह… आह… और जोर से… आह…”आंटी लन्ड की शौकीन लग रही थीं।

15 मिनट तक मैने ऐसे ही गांड मारी, फिर जोरदार धक्के से वीर्य अंदर डाल दिया।

साथ ही उनके मुंह में जीभ डाल दी।

वो भी मुझे किस कर रही थीं, “चूस… आह… मेरे मम्मे दबा…” मैं मम्मे दबाता रहा।

फिर इशारे से बोलीं, “सो जा अब।”

मैं अपनी चादर में आकर सो गया।

सुबह उठा तो वो नहीं थीं।

मैने हॉल में जाकर देखा तो वो, मुझे देखकर बोलीं, “चाय दूं आकाश?”

मेरे जवाब को सुने बिना ही वोह किचन चली गईं।

शायद बहुत समय बाद गांड मरवाई तभी वो बहुत खुश लग रही थीं।

मैं मुंह धोकर चाय पीने बैठा, वो पास बैठीं और हवस से भरी नजरों से मुझसे बोलीं, “कितने दिन रुकने वाला है तू?”

मैंने कहा, “दो दिन और।”

वो खुश होकर बोलीं, “मैं भी… मेला तीन दिन चलेगा न!”

उनका मतलब था चुदाई चलेगी।

उस दिन शाम को वो मेला जाने की जिद करने लगीं।

रोज़ी जी बोलीं, “हाशमी, इन्हें लेकर घूम आ, बाद में हम जाएंगे।”

हमारे पास दो बाइक थीं।

मौसी ने कहा, “तुम पहले जाओ, फिर घर आकर रुक जाना, फिर हम जाएंगे।”

मैं प्रभा आंटी को लेकर निकला।

वो बाइक पर चिपककर बैठीं, उनकी चूचियां मेरी पीठ पर लग रही थीं, “उफ्फ… आकाश, कितनी गर्मी है…” मैं मजा ले रहा था।

मेले में मैने उनको जल्दी घुमाया और घर ले आया।

बाकी सब हमारे आते ही मेला चले गए।

अब घर में हम अकेले थे।

वो बोलीं, “क्या प्लान है तेरा?”

मैंने हंसकर कहा, “जो तेरा है, वही मेरा।”

वो हंसने लगीं। मैंने पूछा, “रात को जो हुआ, अच्छा लगा?”

वो बोलीं, “बहुत अच्छा लगा।

मुझे तेरे जैसे जवान लन्ड की प्यास थी।

तेरे भैया के पापा जब थे, वो चोदते थे।

उनके जाने के बाद से मैं बहुत प्यासी हूँ।

कल तूने गांड की प्यास बुझाई, आज चूत की प्यास बुझा दे।

मेरा पति बन जा, रंडी बनाकर चोद मुझे!”

उनकी अश्लील बातें सुनकर मैं गर्म हो गया।

मैंने कहा, “ठीक है, आज तुझे रंडी और पत्नी बनाकर ही चोदूंगा!”

वो हंसकर बोलीं, “जैसा ठीक लगे, कर, बस मजा आए!”

वो बेडरूम गईं, अपनी चूंची दबाते हुए उंगली से इशारा किया।

मैं भागा और उनको भींच कर जोर-जोर से किस करने लगा,उनकी गांड दबाने लगा।

फिर उनकी साड़ी उतारी, बेड पर लिटाया और पूरे शरीर को चूमा।

वो बोलीं, “आओ मेरे राजा! आज मुझे रंडी बनाकर चोद… चूत फाड़ दे! आह…” मैं जोश में आ गया।

मैने उन्हें नंगी किया।

उनका जिस्म देखकर मैं पागल हो गया – चूचियां 36 की बिल्कुल सख्त थी, गुलाबी निप्पल, कमर पतली, गांड मोटी, चूत गुलाबी और गीली।

मैंने अपने कपड़े उतारे, फिर उनके ऊपर आया और मम्मे दबाने लगा,

“उफ्फ… कितनी कड़क हैं…” वो “आह… दबा जोर से… टाइम वेस्ट मत कर मेरे लाल, मेन काम शुरू कर!”

मैंने कहा, “लाल क्यों बोली?

अब मैं तेरा पति हूँ!”

मैने उनकी टांगें फैलाईं, लन्ड चूत पर रखा, फिर जोर से धकेला।

वो चीखीं, “आहआअआआ… मर गई… धीरे राजा!

आज मैं तेरी लुगाई हूँ… आह…ओह” मैं उनको धीरे-धीरे चोदने लगा।

वो गर्म हुईं, “उम्म्ह… आह… और जोर से…”कह कर मुझे उकसाने लगी।

तब मैने उन्हें 20 मिनट चोदा,

वो झड़ीं तो उनका चेहरा देखने लायक था वो “आह… निकल रहा… उफ्फ… मुझ्झाअ आशाआह” मैंने भी वीर्य चूत में डाला।

पांच मिनट तक, मैं उंगली से उनकी चूत सहलाता रहा, उन्हें किस करता रहा।

मेरा लन्ड फिर खड़ा हो गया ।

वो भी जल्द ही गर्म हुईं।

अब मैने आंटी को कुतिया बनाया। और गांड पर थप्पड़ मारा, “चटाक… चटाक…” की आवाज़ ने लन्ड में वासना फूक दी।

मैने लन्ड गांड पर रखा, फिर प्यार से धकेला।

वो “आह… आह… आह!” कह के चिल्लाईं।

मैंने उनका मुंह दबाया, “चुप रंडी!”

फिर मैने उनके चूंची दबाने लगा जोर जोर से उनके निप्पल खींचकर आंटी की गांड़ मारने लगा।

आंटी बस आआह! ओह आकाश अआह, मेरे राजा खा जा आज मुझे अआआह! मज़ा आ रहा है।

बोलकर मुझे उत्तेजित करती जा रही थी।

अचानक आंटी ने अपनी टांगे मेरी कमर पर फसाई फिर एकदम घूमी और मेरे ऊपर आ गई।

उनका अंदाज़ देखकर मैं उनका फैन हो गया उन्होंने इतनी खूबसूरती से पोजीशन बदली के लन्ड गांड़ में ही रहा।

अब आंटी मेरे ऊपर थी उनकी नंगी पीठ मेरे चेहरे की तरफ थी।

मैं उठकर बैठा और उनके मोटे बूबे को पकड़कर नीचे से धक्के लगाने लगा आंटी के चूंचे मेरे हाथ मे नहीं आ रहे थे, आंटी ने चेहरा पीछे कर के मेरे गाल को चूमा फिर बोली “कैसी रही जानेमन।”

मैने मुस्कुराया और उसको भींच कर ज़ोरदार धक्के लगाने लगा।

आंटी मेरे लन्ड पर अपनी गांड़ घिस रही उनके पसीने की खुशबू मुझे पागल के रही थी।

पूरे कमरे में उन्ह्ह्ह! हमममम! आगाह! आअआआहै। की मन मोहक आवाज़ आ रही थी।

बिना रुके 20 मिनट मैने उनकी गांड मारी, एक हाथ से चूत में भी उंगली की, दूसरे से मम्मे दबाते हुए, किस करते हुए मैने उनको।चखा।

वो “उफ्फ… मार जोर से… आह… मेरी गांड फाड़… उम्म्ह…आआह” वो मोअन कर रही थीं।

मैं अब झड़ा उनकी गांड में ही।

मैं थक गईं, बोलीं, “बस राजा… आज चूत-गांड फाड़ दी तू ने अभी… एक दिन और है!”

फिर हमने कपड़े पहने और आकर हॉल में बैठे।

वो पास आईं, उनकी हवस भरी नजरें अभी भी मुझे देख रही थी ।

मैंने उनका मुंह पकड़ा और किस करने लगा।

तभी बाहर आवाज हुई, हम अलग हुए।

बाहर घरवाले आए।

वो चाय बनाने भाग गईं।

अगले दिन सुबह, सब सोए थे।

प्रभा आंटी ने मुझे किचन से आवाज़ दी, “हाशमी, इधर आ।”

मैं गया। वो बोलीं, “कल रात और आज की चुदाई कमाल की थी, लेकिन एक बात बताऊं?”

मैंने कहा, “क्या आंटी?” वो मुस्कुराकर बोलीं, “मुझे पता है, तुम्हारे और रोजी के बीच क्या चल रहा है।

वो तेरी भाभी है, लेकिन तू उसे चोदता है।

मैंने कई बार देखा है, तुम दोनों की चोरी-छिपे चुदाई करते हुए।

रोजी की सिसकारियां सुनती हूँ मैं हमेशा , ‘आह आकाश… जोर से…वाली’।

मुझे कोई ऐतराज नहीं, बल्कि खुशी है।

तू जवान है, रोजी प्यासी है।

लेकिन अब मुझे भी शामिल कर ले अपनी चुदाई में, मैं भी तेरी रंडी बनूंगी।”

उनकी बात सुनकर मैं चौंक गया, लेकिन गर्म भी हो गया।

मैंने कहा, “आंटी, सच?

तो आज रात फिर?” वो बोलीं, “हाँ, लेकिन अब और ज़्यादा मजा लेंगे।”

उस दिन दोपहर में भी मौका मिला।

सब बाहर थे, हम अकेले।

प्रभा आंटी बोलीं, “चल, अब मेरी चूत चाट।”

मैंने उन्हें बेड पर लिटाया, टांगें फैलाईं।

उनकी चूत गुलाबी थी, गीली।

मैं जीभ से चाटने वो मोअन करने लगीं, “आह… आकाश… चूस मेरी चूत…

उफ्फ… कितना मजा… आह…”मैंने दाने को चूसा, उंगली डाली।

वो कमर उछालने लगीं, “उम्म्ह… और… आह…मेरा निकल रहा है…” बस वो बोलते हुए झड़ गईं।

फिर मैंने लन्ड उनके मुंह में दिया और कहा, “चूस रंडी!”

वो चूसने लगीं, “ग्लप… ग्लप… आह… कितना मोटा…” 10 मिनट मैने लन्ड चूसवाया, फिर चूत को भी पेला।

वो बहकने लगी “आह… फाड़ दे… जोर से…अआह” तब मैने उन्हें 15 मिनट चोदा, उस समय हम दोनों साथ झड़े।

शाम को फिर मेला था।

रात में सोने का वक्त हुआ तो, वो मेरे पास लेटीं।

मैंने चादर में हाथ डाला, और उनके मम्मे दबाए।

वो “आह… धीरे… सब सो रहे…” लेकिन मैं नहीं माना।

फिर गांड में उंगली डाली, “उफ्फ… हाशमी…” फिर मैने ज़ोर से लन्ड गांड़ में पेला।

उनकी गांड़ की धीरे-धीरे मारा, वो सिसकारियां लेती रहीं, “आह… आह… मजा आ रहा… उफ्फ…”।

अगले दिन सुबह, वो बोलीं, “आकाश, अब घर जाओगे, लेकिन याद रखना, जब भी आना, मुझे चोदना।

रोजी को भी बता देना, मैं तुम्हारे बारे में जानती हूँ।”

मैंने कहा, “ठीक है आंटी।”

जब मैं घर आया तो उनसे बात चीत कम हो गई, लेकिन वो यादें आज भी ताजा हैं।

प्रभा आंटी का वो सेक्सी फिगर – 36 की चूचियां, 28 की कमर, 38 की गांड मुझे हमेशा याद रहेगा – उफ्फ, क्या माल थी।

बस एक बार रोज़ी जी ने मैसेज करा था के उनकी सास प्रेगनेंट है, और वो बच्चा गिरवाने जा रही है।

जिसकी वजह में हूं और वो दोनों अगले साल मुझसे मिलने आएंगे।

मुझे तो बस उसी पल का इंतज़ार है जब मैं एक साथ दो अप्सराओं के साथ बिस्तर गरम करूंगा।

उनकी मोअन्स “आह… उफ्फ… जोर से…” अभी भी मेरे कान में गूंजती हैं।

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