सगी विध्वा चाची की चुदाई :- chachi sex story

चाची की चुदाई
chachi ki chudai

दोस्तो, मेरी चाची विधवा हैं.
वे मेरे चाचा की मौत के बाद एकदम से अकेली सी हो गई थीं.

वे एकदम मस्त माल दिखती थीं.
आज भी बहुत लोग मेरी चाची की चुदाई की कामना करते हैं.

चाची की उम्र अभी 34 साल ही थी.
उनका फिगर 36-32-38 का था और रंग बहुत गोरा था.

उनके दो बच्चे थे और वे भी अभी बहुत छोटे थे.

मेरा घर उनके घर से दो घर दूर था, पर छतें मिली हुई थीं.
वे अपने घर में अकेली ही रह रही थीं.

चाचा की मौत के करीब एक साल बाद ही मेरी चाची का चक्कर पड़ोस के एक आदमी से चल गया और वे दोनों अक्सर चुदाई करने लगे.
वे दोनों अक्सर रात को चुदाई की मस्ती में मस्त रहने लगे थे.
चाची भी अब खुश रहने लगी थीं.

लेकिन इस बात का किसी को पता नहीं चल सका था.

उस आदमी के साथ चाची ने करीब 3 महीने तक मौज काटी.

उसके बाद मुझे चाची पर कुछ शक सा हुआ तो एक दिन मैंने उनका फोन चैक किया.
उनके मोबाइल में उनके पड़ोसी का नंबर मिला, उस नंबर पर चाची रोज रात को बात करती थीं.
मेरा शक सही निकला था.

मैंने उसी रात से उन दोनों पर नजर रखनी शुरू कर दी.
तब सर्दी का मौसम था.

उस रात के करीब 10:30 बजे थे, तभी चाची का दरवाजा खुलने की आवाज आई.
मैं अलर्ट हो गया. मैंने देखा कि चाची ने दरवाजा नहीं खोला था, बल्कि यह दरवाजा किसी और ने खोला था और चाची भी दरवाजे खुले की आहट से कुछ चेतन हो गई थीं.

शायद चाची समझ गई थीं कि इतनी रात को वही आया होगा.

मैं अपनी छत से उनके घर में उतर गया तो देखा कि वे दोनों दूसरे कमरे में लाइट बंद करके चुदाई कर रहे थे.

मैं बाहर दरवाजे से उनकी बस आवाज ही सुन पा रहा था.
दरवाजे के नीचे से भी झांक कर देखने की कोशिश की मगर अन्दर का कुछ नहीं दिख रहा था.

करीब 15 मिनट तक उन दोनों की चुदाई चली होगी.
उस दौरान मैं बाहर खड़ा होकर बस उनकी आवाजें सुन रहा था और अपना लंड हिला कर मुठ मार रहा था.
कुछ देर बाद मैं वहीं पर झड़ गया.

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तभी ऐसी आहट मिली, जिससे आभास हुआ कि उनका काम भी खत्म हो गया था.
मैं छुप गया.

फिर वे दोनों बात करने लगे और कुछ मिनट बाद कमरे का दरवाजा खुला.
वह आदमी कमरे से बाहर निकल कर अपने घर चला गया.

उसके बाद मेरा मूड अपनी देसी चाची की चुदाई का होने लगा.
मैंने हिम्मत करके चाची को फोन किया और उन्हें उनकी पूरी करतूत बता दी.

यह सुन कर चाची ने मेरा फोन काट दिया.
मैंने फिर से फोन किया तो चाची ने उठाया ही नहीं.
तब मैंने फिर से किया तो चाची ने अपना फोन ऑफ कर लिया.

चाची बहुत घबरा गई थीं कि मैं ये बात जान गया.

उसके एक घंटा बाद चाची ने ही मुझे वापस फोन किया और वे रोने लगीं.
वे कहने लगीं कि यह बात तुम किसी को मत बताना.

मैं- ठीक है. नहीं बताऊंगा पर आपको उस आदमी से अब मिलना बंद करना होगा.

उन्होंने हामी भरते हुए कहा- वैसे भी अब उसका दूसरे शहर में ट्रांसफ़र हो गया है. दो दिन बाद वह चला जाएगा.
मैंने कहा- ठीक है.

वे कहने लगीं- तुम इधर आओ, मैं तुम्हें सब बताती हूँ. फोन पर यह बात करना ठीक नहीं है.
मैं चाची के पास आ गया.

वे मुस्कुरा रही थीं तो मैं समझ गया कि चाची मुझे भी मलाई चाटने के लिए कह रही हैं.

मैंने झपट कर उनको पकड़ लिया.
लेकिन चाची ने मुझे धक्का दे दिया और खुद से अलग कर दिया.

मैंने कहा- मुझे भी आपके साथ एक बार सेक्स करना है.
लेकिन चाची ने मना कर दिया.

मैं कुछ नहीं बोला और अपने घर वापस आ गया.
इससे चाची को भय लगा कि कहीं मैं किसी से कुछ कह न दूँ.

कुछ दिन बाद चाची मुझसे हंसी मजाक में बात करने लगीं और वे अपनी बातों के दौरान ही मुझे यह भी बताने लगीं कि हमारे बीच यह सब नहीं हो सकता. मैं तेरी चाची हूं.
उनके समझाने का मुझ पर जरा सा भी असर नहीं हो रहा था.

मैंने कहा कि चाची मैं आपका भतीजा हूँ … लेकिन मेरा मन नहीं मान रहा है. मैं आपको एक बार पाना चाहता हूँ!
वे चुप हो गईं और मैं उनके पास से अलग हट गया.

अब ऐसे ही 4 दिन बाद चाची का वापस कॉल आया.

इस बार वे मुझसे चुदवाने के लिए मान गई थीं.
शायद उन्हें इतने दिनों से लौड़े का स्वाद नहीं मिल पा रहा था, जिस वजह से चाची की चूत ने उन्हें मेरे साथ चुदवाने के लिए राजी होने पर मजबूर कर दिया था.

उन्होंने मुझसे कहा- आज मेरे घर आ जाना और मेरे साथ अपने मन की कर लेना, बस तू कंडोम लेकर जरूर आना.
उनकी बात सुनकर मैं बहुत खुश हुआ.

मैंने उनसे कहा कि रात को रुकने के लिए मुझे मम्मी से कहना पड़ेगा.
उन्होंने हंस कर कहा कि मैं वह इंतजाम कर चुकी हूँ.

जब सारी बात जानी तो मालूम हुआ कि चाची ने एक दिन पहले ही मेरे पापा से बात करके उन्हें बोल दिया था कि अब से उनके साथ उनके घर में रात को मैं सो जाया करूं.

चाची के मुँह से यह बात सुन कर मुझे और भी ज्यादा अच्छा लगा.
मैं बहुत खुश था कि आज मुझे चुदाई करने को मिलेगी, वह भी अपनी सगी चाची के साथ.

फिर रात हुई तो चाची ने मुझे अपने वाले रूम में ही सोने को बोला.
मैं बहुत खुश हुआ.

करीब 12 बजे चाची ने मुझे स्टोर रूम में बुला लिया क्योंकि कमरे में उनके दोनों बच्चे सो रहे थे.

जैसे ही मैं उनके पास गया और उनको हाथ लगाया, मेरे बदन में एक झुरझुरी सी हुई और मुझे बहुत मजा आया.

मैं आज पहली बार किसी औरत के पास सेक्स के लिए आया था और आज ही मैं पहली बार सेक्स करने वाला था.
आज मेरा चुदाई का सपना पूरा होने वाला था.

यही सब सोच कर मेरा लंड पूरा कड़ा हो गया था.

मैंने चाची को किस करना चालू कर दिया.
वे भी मेरे साथ चुंबन में साथ देने लगी थीं.

सच में चाची के रसीले होंठों को चूसने में बड़ा मजा आ रहा था.

आज की रात मेरे लिए ऐसी थी मानो मुझे जन्नत की सैर करने का अवसर मिल गया हो.

तभी चाची ने मेरे एक हाथ को उठा कर अपनी चूचियों पर रख दिया.
मैं गनगना गया और मस्त होकर अपनी सगी चाची की रस भरी चूचियां दबाने लगा था.

चाची ने मेरे कान में कहा- दूध चूस लो.

मैं बौरा गया और मैंने एक ही झटके से उनके कुर्ते को उतार दिया.
चाची ने अन्दर ब्रा नहीं पहनी थी.
उनके दूध एकदम से बाहर आ गए.

आह … चाची की चूचियां एकदम सालिड थीं.

उनकी चूचियां बहुत ही मोटी मोटी थीं और मेरे हाथों में भी नहीं आ रही थीं.
फिर भी मैं जैसे बन पड़ रहा था, उन्हें पूरा दबाने की कोशिश कर रहा था.

तभी चाची ने मुझे अपने दूध पर दबाया और अपने हाथ से अपना एक निप्पल मेरे मुँह में दे दिया और मेरे कान में कहने लगीं- ले चूस ले बेटा … ले ले मजा अपनी प्यासी चाची का … आह पूरा मजा ले ले.

मैं भी उनके निप्पल को चूसने लगा और दूसरे दूध को मसलने लगा.
मुझको बहुत मजा आ रहा था.

बहुत देर चाची को किस करते करते और उनकी चूचियां दबा दबा कर मैंने उनको को पूरा गर्म कर दिया था.

वे आह आह करने लगी थीं और कह रही थीं- अब बस कर पहले मेरी चूत की आग बुझा दे.
यह सुनते ही मुझे चाची की चूत का ख्याल आया.

फिर मैंने देर न करते हुए चाची की सलवार को निकाल दिया और अपना लंड चाची के हाथ में दे दिया.

वे मेरे लौड़े को सहला रही थीं और उसे मुठिया रही थीं.
मेरा लंड अब पूरा फटने को हो गया था.

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फिर मैंने जल्दी से आसन सैट किया और चाची के ऊपर चढ़ गया.
चाची ने भी मेरे लौड़े के लिए अपनी चूत खोल दी.

मैंने अपना लंड चाची की चूत पर लगा दिया और एक धक्का मारा तो मेरा लौड़ा चाची की चूत में एकदम से चला गया.

क्योंकि चाची की चूत काफी बड़ी थी और पड़ोसी के लंड से चुद चुद कर एकदम खुली हुई थी.
चाची ने मेरा लौड़ा बड़े आराम से खा लिया और वे चुदाई करने के लिए कहने लगीं.

मैं पूरा जोर लगा कर धक्के मारने लगा और बस 5 मिनट में ही झड़ गया.
क्योंकि ये मेरा पहली बार था और मुझे सेक्स करना भी अच्छे से नहीं आता था.

मेरा अपनी सगी चाची की चूत चोदने का सपना आज पूरा हो गया था.
मुझे बहुत मजा भी आया था लेकिन मेरी चाची को ज्यादा मजा नहीं आया था.
वे अब तक नहीं झड़ी थीं.

मैंने कुछ देर बाद फिर से चाची को चोदा तो इस बार उन्हें भी मजा आया.

अब वे कहने लगीं- मैंने पड़ोस के आदमी से अपने संबंध खत्म कर लिए हैं और वह बाहर चला गया है. अब तुम्हें ही हर रात मेरे पास ही सोना है.
मैंने कहा- हां यह ठीक भी है चाची. घर की बात घर में ही रहनी चाहिए.

उसके बाद से मैंने चाची को रोजाना चोदना चालू कर दिया.
अब मैं भी चुदाई करना पूरी तरह से सीख गया हूँ.

धीरे धीरे मेरा लौड़ा भी बड़ा हो गया था.
अब चाची की चूत में मेरा लंड पूरा अन्दर तक जाता था.

लेकिन अभी भी एक कसक थी कि चाची को मैं खुल कर नहीं चोद पा रहा था क्योंकि उनके दोनों बच्चों के कारण रात को छुप कर चुदाई करना पड़ रही थी.

सब मिला कर मुझे पंद्रह बीस मिनट में ही चाची की चूत में लंड पेल कर चुदाई करके वापस अपने कमरे में आना पड़ता था.
चाची अपने बच्चों के सो जाने के बाद मुझसे एक छोटे से स्टोर रूम में चुदवाती थीं.

कुछ दिन बाद घर में हम दोनों अकेले रह गए क्योंकि उनके दोनों बच्चे अपने मामा के यहां घूमने गए थे.

अब हम दोनों को पूरा मज़ा आने वाला था.
उस रात को हम दोनों एक ही कमरे में थे.

मैं आज चाची के बिस्तर पर ही सोने को तैयार था.

जैसे ही रात हुई, मैं चाची के पास बिस्तर पर आ गया और उनको किस करने लगा.

अब तो वे भी मेरा पूरा साथ दे रही थीं.
हम दोनों पूरे जोश में थे.

मैं चाची की चूचियां दबा रहा था.
चाची मादक सिसकारियां भर रही थीं और जल्द ही वे भी पूरी गर्म हो गई थीं.

मैंने चाची की सलवार निकाल दी और चाची की टांगों के आ गया.
चाची समझ गईं और उन्होंने अपनी टांगें फैला दीं.
मैं उनकी चूत चाटने लगा था.

चाची पूरी तरह से मदहोश हो गई थीं और कामुक आवाजें करती हुई ओह आह कर रही थीं.
उन्होंने अपनी चूत में मेरा मुँह पूरा दबा रखा था.

मुझे भी पूरा मजा आ रहा था.
मैं अपनी पूरी जीभ को चाची की चूत में पेल रहा था.

चूत के रस के साथ साथ मैं चाची के गुलाबी दाने को भी अपने होंठों से खींच कर चूस रहा था.

कुछ ही देर में चाची की चूत से पूरा पानी निकलने लगा था.
मैं चूत को चाटता गया और इसी वजह से चाची फिर से पूरी तरह से गर्म हो चुकी थीं.

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वे जोर जोर से बस यही बोल रही थीं- अब और मत तड़पा, जल्दी से चूत चोद … मुझसे रहा नहीं जा रहा.
मैं अभी भी अपनी चाची की चूत को ही चाट रहा था.

मेरा लौड़ा भी अब चाची की चूत में जाने को पूरा तड़प रहा था.
फिर मैंने आसन सैट किया और चाची की एक टांग को उठा कर अपना लौड़ा उनकी चूत में पेल दिया.

जब मैंने लंड पेला तो बहुत ही तेज धक्का मार दिया था.
उससे चाची के मुँह बहुत तेज आवाज निकल गई- आह … आह आराम से कर … दर्द हो रहा है!

अब मेरा लौड़ा पहले से ज्यादा मोटा और लंबा हो गया था.
मैं चाची की चूत को फाड़ सकता था जिस वजह से चाची को दर्द हो रहा था.
मैं तेज धक्के लगाता रहा और उन्हें धकापेल चोदता रहा.

मेरी चाची भी खुल कर आवाज कर रही थीं.
पूरा पलंग हिल रहा था और चप चप की आवाज सारे कमरे में गूंज रही थी.

चाची भी मेरा पूरा साथ दे रही थीं; वे अपनी गांड उठा उठा कर मेरे लंड को धक्का दे रही थीं.

वे बस यही बोल रही थीं- और तेज और तेज फाड़ दे आज मेरी चूत को … आह बहुत मजा आ रहा है.
मैं भी अपनी चाची की पूरी ताकत से चुदाई कर रहा था.

फिर मैंने उनकी दोनों टांग अपने कंधों पर रख लीं और जोर जोर से चुदाई करने लगा.

ऐसे ही चाची को दस मिनट तक चोदने के बाद मैंने चाची से घोड़ी बनने को बोला.
चाची फट से घोड़ी बन गईं.

फिर मैं बेड से नीचे खड़ा होकर चाची को चुदाई करने लगा.
अब तो चाची को और भी ज्यादा मजा आ रहा था.

चाची पूरा साथ दे रही थीं, वे अपनी गांड हिला हिला कर मेरा लौड़ा ले रही थीं.

सच में उस वक्त मुझे अपनी चाची की चुदाई करने में बहुत मजा आ रहा था.

कुछ देर बाद अब चाची झड़ने वाली थीं. उनकी आवाज और भी तेज होने लगी- ओह आह और तेज और तेज!
मैं भी फुल जोश में धक्का मार रहा था.

थोड़ी ही देर में चाची का पानी निकल गया और कुछ तगड़े धक्के मारने के बाद मेरा भी माल निकलने वाला हो गया था.

मेरी रफ़्तार और तेज हो गई थी और अंततः मैं चाची की चूत में ही झड़ गया.

झड़ने के बाद मैं चाची के ऊपर ही पड़ गया और करीब 15 मिनट ऐसे ही पड़ा रहा.
अब हम दोनों आराम करने लगे.

थोड़ी देर में ही चाची और मैं वापस किस करने लगे.
मैं चाची की चूचियां दबा रहा था और चाची के निप्पल चूस रहा था.

इस बार मैं चाची की चूत नहीं गांड मारना चाहता था, तो मैंने चाची को बोला.
लेकिन चाची ने मना कर दिया.

पर मेरे बार बार कहने से चाची मान गईं और बोलीं- आराम से डालना, आज तक मैंने गांड नहीं मरवायी है.
मुझे भी ये सुन कर अच्छा लगा कि चलो एक चीज तो फ्रेश बिना चुदी मिली.

मैंने चाची को फिर से घोड़ी बनाया और तेल को अपने लंड पर लगा लिया.
बाद में मैंने चाची की गांड पर भी तेल लगाया और अपना लौड़ा चाची की गांड पर सैट कर दिया.

अब मैं आराम से लंड सैट करने करने लगा.
उनकी गांड बहुत टाइट थी, मेरा लौड़ा अन्दर नहीं जा रहा था.

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कुछ देर बाद मैंने चाची की गांड में उंगली को पेला और उनकी गांड को थोड़ा ढीला किया, फिर लौड़ा रख कर आराम से अन्दर करने लगा.

अब थोड़ा सा लंड अन्दर जा चुका था और चाची को दर्द भी हो रहा था.
फिर मैंने थोड़ा और दबाव दिया तो आधा लंड अन्दर चला गया.

चाची के मुँह से आवाज निकल रही थी- आह … दर्द हो रहा है … मैं मर गई बाहर निकाल जल्दी से … बहुत दर्द हो रहा है … आह फट गई … बाहर कर!

मैंने लंड बाहर नहीं निकाला, बस थोड़ी देर ऐसे ही रुका रहा.
फिर जब चाची का दर्द कम हुआ तो मैंने आराम आराम से धक्के देने शुरू कर दिए.

अब चाची को भी मजा आने लगा था और वे मजे से आह आह करने लगी थीं.
साथ ही वे अपनी गांड को पीछे करती हुई लंड को धक्का देने लगी थीं.

कुछ ही देर में चाची पूरा साथ देने लगी थीं और वे अपनी गांड हिला हिला कर चुदाई करवा रही थीं.
चाची बोल रही थीं- आह … गांड मरवाने में इतना मजा आता है, यह तो मैंने कभी जाना ही न था … आह और तेज तेज कर … और अन्दर तक कर … सच में बहुत मज़ा आ रहा है.

मैं भी अब पूरी ताकत से धक्का लगा रहा था और एक हाथ से चाची की चूत में उंगली भी कर रहा था.
इससे चाची दो तरफा मजा ले रही थीं और मैं भी चाची की गांड चुदाई का पूरा मजा ले रहा था.

पूरा कमरा चाची की मादक आवाजों से गूंज रहा था.
मेरी जांघें चाची के चूतड़ों से टकरा रही थीं, जिससे थप थप की आवाज निकल रही थी.

थोड़ी ही देर में चाची झड़ने वाली थीं लेकिन मेरा अभी नहीं हुआ था तो मैं लगा हुआ था.

उधर चाची चरम पर आ गई थीं और मुझसे बार बार बोल रही थीं- आह और तेज पेलो … आह और तेज … बहुत मजा आ रहा है.
वे यही सब कहती हुई झड़ गईं. ( antarvasna kahani )

मैं अभी भी उनकी गांड बजा रहा था.
उनकी शिथिलता से मुझे भी अहसास होने लगा था कि अब मुझे झड़ जाना चाहिए.

तभी मेरे लंड में झनझनाहट सी होना शुरू हो गई और मैं तेज तेज स्वर में चिल्लाता हुआ झड़ने लगा- ओह आह मेरी जान … आह आह साली मेरी रखैल … आह क्या मस्त गांड है तेरी … आह!

इस तरह से मैंने मेरी सेक्सी चाची की चुदाई का मजा लिया.

मैंने चाची की गांड में ही अपना सारा का सारा माल झाड़ दिया था.
मैं चाची की गांड से लंड निकाल कर उनके एक बाजू में लेट गया.

मैं बहुत थक चुका था.
चाची मुझे देख कर मुस्कुरा रही थीं.

तो दोस्तो, यह मेरी एक सच्ची सेक्स कहानी थी, जो मैंने आप सबके सामने रखी.

आपको इस पर इंडियन चाची की चुदाई कहानी पर क्या कहना है, प्लीज मुझे मेरी ईमेल पर मैसेज करके जरूर बताएं.
धन्यवाद.

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