बड़े घर की बहू को प्यार मैं फंसा कर चोदा | Bahu ki Chudai Hindi Sex Kahani

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कड़ी रात का समय है।

नीलू- “अहह… धौरेऽऽ अहह… अहह… अहह… तुम दोनों ओड़ा धीरे नहीं कर सकते क्या? अहह.. आह्ह..”

जय- साली धौरे करने में क्या मजा, जो तेज करने में है।

राज- हो रे नीलू तू मज़े कर। तेरी चूत और गाण्ड में लौड़ा डालने में जो मज़ा है वो साला रंडी चोदने में भी नहीं आता।

नीलू- बहुत दर्द होता है मुझे। दो लण्ड एक साथ लेना आसान है क्या? अहह… तुम दोनों का क्या है रोज मुझे चोदते हो। लेकिन मुझे जो सहना पड़ता है वो तुम दोनों को क्या मालूम?

राज- क्यों री क्या हो गया?

नीलू- ओह्ह… आज मालकिन पूछ रही थी कि मैं इतना लड़खड़ाकर क्यों चल रही हैं? मैंने तो बोल दिया कि मेरा पैर फिसल गया आ।

जय- कौन सी मालकिन ?

नीलू- ओहह… बड़ी मालकिन ने।

जय- ओहह… साला इन मालकिन लोगों को भी कोई काम नहीं है।

नीलू- कल जो तुम दोनों ने मेरी हालत की, इसके बाद मुझसे चला भी नहीं जा रहा था। मालूम है?

राज- हाँ हाँ ठीक है, अब मूड खराब मत कर।

फिर वो दोनों नीलू को आधा घंटा चोदते हैं, और वहाँ पर सो जाते हैं तीनों।

यह हाल था उस आलीशान वर्मा मेशन के बाहर साइड में एक छोटे से कम का। रवि वर्मा, उम्र 45 साल, जो एक मिल्क फैक्टरी का मालिक हैं, और उसकी पत्नी सावित्री वर्मा, उम्र 30 साल। सावित्री रवि वर्मा की दूसरी पत्नी है। इसीलिए उनकी उम्र में इतना अंतर है। रवि वर्मा की पहली पत्नी अब नहीं रही। उसकी पहली पल्ली से तीन बच्चे हैं, दो बेटे और एक बेटी। दोनों बेटों की शादी हो चुकी हैं। बेटी अभी पढ़ाई कर रही है। बड़ा बेटा विशाल वर्मा, उम्र 28 साल और दूसरा बेटा सौरभ, उम्र 26 साल। इसके अलावा घर में एक नौकरानी हैं जिसका नाम नीलू है, उम्र 35 साल, साँवली औरत।

रोज दोनों बेटे और पिता फैक्टरी आफिस जाते थे। शाम में फिर वापस आते थे। यही आ रोज का रुटीन।
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आज सनडे था। फैक्टरी बंद तो नहीं थी लेकिन वहीं ज्यादा काम भी नहीं था। इतने में भी रवि वर्मा और उसके बेटे आफिस गये थे। रवि वर्मा अपने बिजनेस को लेकर बहुत सीरियस था। इधर घर में सनडे होने की वजह से घर की औरतें सुस्त होकर बैठी थी अपने-अपने रूम में।

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इधर विशाल की पत्नी नेहा बाहर टहलने के लिए आती है। नोर्मलि घर की औरतें कम ही बाहर निकलती भी घर के। लेकिन सनई होने की वजह से नेहा बाहर निकली थी। नेहा एक बेहद खूबसूरत औरत हैं, 36-28-38 का मस्त फिगर, गोरा बदल। वो एक बड़े घर की लड़की औ। अमीर और खबसरत होने के कारण विशाल वर्मा ने उसे पसंद किया था। एकदम बला लगती थी लेहा। वां टहलते हुए उस बड़े घर के आगे से होकर जा रही थी। बाहर की फ्रेश हबा का आनंद ले रही थी। तभी वो थोड़ा घर के पिछले साइड की तरफ गई थी की उसे उधर बीड़ी की महक आई, तो उसने अपनी नाक पर हाथ रख लिया।

नेहा- “येवं की महक कहाँ से आ रही है?” उसे महक घर के पीछे साइड में बने छोटे से कम की तरफ से आती है। वो रूम नौकरों के लिए बना था। नेहा उधर जाती हैं।

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उस रूम की एक खिड़की भी जो बंद भी। लेकिन दरवाजे से महक आ रही थी। नेहा को उधर जाते हए अजीब लग रहा था। वो इतने बड़े घर की बहू इस नौकर के रूम में क्यों जा रही है? लेकिन फिर भी वो हिम्मत करके दरवाजे के पास जाती है। वहीं से ज्यादा महक आ रही भी।

जब वो दरवाजे से अंदर देखता है तो दो लोग बौड़ी पी रहे थे और महक छोड़ रहे थे। वो दोनों लारी वाले थे, राज और जय। आज सजड़े आ तो वो दोनों को कोई काम नहीं था। इसलिए बेकार बैठे थे। दोनों एकदम गंदे काले आदमी, लुंगी और शर्ट में थे, एकदम बदसूरत, टिपिकल लावाल्ले। राज लगभग 50 साल का था और जय 57 साल का। उन दोनों ने नेहा को नहीं देखा था। वो बस बीड़ी पी रहे थे।

तभी अचानक राज की नजर दरवाजे पर जाती है, और नेहा को वहीं देखकर वो हड़बड़ा जाता है- “ओहह… ओहह.. मालकिन..”

राज की बात सुनकर जय भी डरकर दरवाजे की तरफ देखता है। नेहा को देखकर वो भी हर जाता है।

नेहा अब गुस्सा दिखाते हुए. “क्या हो रहा है यहाँ?”

राज- ओहह… मालकिन ओहह… हम बस।

नेहा- क्या बस हाँ? यहाँ पर तुम दोनों सिगरेट पी रहे हो, और हवा खराब कर रहे हो।

राज- ओहह… सारी मालकिन।

नेहा- क्या सारी हाँ?

राज मन में- साली नाटक कर रही हैं। साली का रूवाब तो देखो।

नेहा- तुम दोनों को और कोई काम नहीं है?

जय- मालकिन आज काम कम है. इसलिए फैक्टरी में कुछ काम नहीं है।

नेहा- तो यहाँ पर सिगरेट पीने का?

जय- माफ कर दीजिये मालकिन।

नेहा- ठीक है ठीक है। आगे से ऐसा मत करना।

दोनों साथ में- “जी मालकिन…

फिर नेहा वहाँ से निकल जाती हैं।

राज की नजर नेहा की मटकती हई बड़ी गाण्ड पर भी। वो अपना लण्ड लुंगी के ऊपर से मसलते हुये कहता है “साली रंडी सुनकर चली गई। साली की गाण्ड में बहुत दम है..” कहकर दोनों हँसते हैं।

इधर नेहा घर में आकर सावित्री से- “माँजी, उन दोनों आदमियों को कुछ काम नहीं है क्या?”

सावित्री किसकी बात कर रही हो नेहा?

नेहा- वो। जो उस पीछे वाले रूम में हैं।

सावित्री वो। ट्रक ड्राइवर्स?

नेहा- हाँ।

सावित्री -लेकिन तुम वहीं क्यों गई औ?
फिर नेहा सब बताती है।

इधर राज और जय बात कर रहे थे।

जय- अरे उसने जाकर बोल दिया तो बड़े साहब को?

राज- अरे नहीं बोलेगी, क्यों डरता है?

जय- फिर भी। बोल दिया तो नौकरी गई।

राज भी अब ओड़ा सोचता है इस बारे में- “दर मत। में और एक बार माफी माँगकर आता है अभी।

जय- ठीक हैं।

फिर राज बाहर चला जाता है। नार्मली राज और जय कभी घर के अंदर नहीं जाते। राज मुख्य दरवाजे से अंदर जाता है। घर काफी आलीशान था, जो राज ने सपने में भी नहीं देखा था। वो चलते हुए किचेन के पास पहुँचा। उसे वहाँ नीलू दिखती है। नीलू की पीठ उसकी तरफ भी। वो अब धीरे से अंदर जाता है और उसको पकड़ लेता है।

नीलू अचानक डर जाती है।

राज- कैसी हो राड

नीलू- अरे राज तुम यहाँ क्या कर रहे हो? छोड़ो मुझे मालकिन आ गई तो लोचा हो जायगा।

राज- तेरी मालकिन से ही मिलने आया हैं।

नीलू- कौन सी मालकिन से और किसलिए?

राज. वो सब रहने दे। चल जा एक राउंड करते हैं।

नीलू- त पागल हैं क्या? यहाँ पर मालकिन आ गई तो मेरी और तेरी दोनों की नौकरी जाएगी।

राज- “कुछ नहीं होता तू र मत..” ऐसा बोलकर वो नीलू की चूत रगड़ने लगता है।

नीलू- “ओहह… करीम्म…”

राज लील से सटकर खड़ा था। उसका लण्ड खड़ा था, उस गंदी सी लुंगी में।

नीलू- करीम्म नहीं। कोई आ जाएगा, छोड़ो मुझे।

राज- “क्या नखरे कर रही है। कोई भी तो नहीं आ रहा..’ कहकर राज उसके चूचे दबाने लगता है।

नीलू- “अहह… करीम्म मत करो…”

राज नीलू की गर्दन पर अपनी जीभ फेर रहा था- “मेरी रांड आज रात और मजे करेंगे..”

नीलू जो अब गरम हो चुकी थी, बोली- “हाँ मेरे राज…”

इस दृश्य के बीच राज और नीलू दरवाजे का भल गये थे। दरवाजे पर कोई खड़ा इन दोनों के कारनामे देख रहा
आ।

जो दरवाजे पर भी, वो और कोई नहीं नेहा थी। वो कुछ देर पहले ही आई ी। वो पहले तो हैरान भी इन दोनों को इस तरह देखकर। लेकिन उसे क्या पता कि ये बहुत दिनों से चल रहा है। नेहा चुप खड़ी होकर देख रही थी।

नीलू- करीम्म यही नहीं, कोई आ जाएगा।

राज- जील्ल राजी बस एक बार चोद लेने दे, फिर चला जाऊंगा।

नेहा चोदने का नाम सुनकर थोड़ा शर्माती है। उसे धिन आ रही थी। यह नौकरानी का चक्कर ट्रक वाले से। नेहा जाना चाहती थी वहाँ से, लेकिन पता नहीं क्यों वो नहीं गई थी।
तभी नीलू की नजर किचेन के एक ग्लास पा जाता है। जहाँ से उसे नेहा की परछाई दिखता है। नीलू झट से राज से अलग हो जाती है।

राज- “क्या हो गया रंडी?”

नेहा राज के मुँह से रंडी शब्द सुनकर गुस्सा हो जाती हैं। एक औरत को कोई गाली दे, उसे पसंद नहीं था। नेहा अपना गुस्सा कंट्रोल नहीं कर पाती।

नेहा- लील यह सब क्या है?

नेहा की आवाज सुनकर राज भी इधर घूम जाता है।

नीलू- “वो। मालकिन। मैं वो..”

नेहा- “तुम सबने इस घर को समझ क्या रखा है?” नेहा राज की तरफ गुस्से से देख रही थी- “और राज तुम… मैंने तुमको तब बोला था ना कोई भी गलत चीज मत करना…

राज- मालकिन गलती हो गई। माफ कर दो।

नेहा कुछ बोले बिना गुस्से से देखती रहती है।

राज मन में- “साली ने दूसरी बार डिस्टर्ब किया मुझे। वैसे साली माल है। क्या चूचे हैं? क्या गाण्ड है? एकदम मस्त गाण्ड लग रही हैं। साली यह हाथ लग जाए तो मेरे लौड़े के मजे हो जाएं. राज नेहा की तरफ घर रहा था, जो नेहा देख लेती हैं।

नेहा- देखो तुम मेरे सामने ये सब शब्द इस्तेमाल मत करो।

राज- तो कैसे शब्द इस्तेमाल कर मालकिन?

नेहा- मुझे नहीं पता।

राज- “मालकिन अब चुदाई की चुदाई नहीं बोलेंगे तो और क्या बोलेंगे’

राज फिर से चुदाई शब्द इस्तेमाल कर रहा था नेहा के सामने। इसी बीच राज नेहा के पूरे जिश्म को स्कैन कर रहा था। नेहा के मस्त फिनगर का वो दीवाना हो गया आ।

राज- “मालकिन एक बात बोलं? आपके पति बहत लकी हैं जो उनको आप जैसी माल बीवी मिली…” और राज अब नेहा को माल बोल रहा था।

नेहा को अपनी तारीफ अच्छी तो लगती है लेकिन माल बोलने पर उसे गुस्सा भी आता है- “मैंने बोला ना गंदे शब्द मत इस्तेमाल करो..”

राज- “मालकिन मेरी जिंदगी में एक ही स्वाहिश रह गई है कि मैं किसी बड़े घर की औरत को चोदूं..”

नेहा इस बात पर हँसती हुई- “सपने अच्छे देख लेते हो। जो कभी होने वाला ही नहीं है उसके बारे में क्यों सोच रहे हो? वैसे तुम्हारे पास हैं ना नीलू। उसी से काम चला लो..” बोलकर वो हैंसने लगती हैं।

राज- लेकिन मालकिन… मझे तो गोरी बदन वाली मस्त माल चाहिए जो अमीर हो।
है
राज अब हिमांड तो ऐसे कर रहा था जैसे उससे किसी ने पूछा हो की उसे कैसी लड़की चाहिए? राज उत्तना बोलकर नेहा के करीब जाने लगता है। राज को अपने पास आता देखकर नेहा को थोड़ा अजीब लगता है। काला गंदा बढ़ा जो एक गंदी सी लुंगी और शर्ट में था एक खूबसूरत औरत की तरफ बढ़ रहा था। उसकी लुंगी का एक हिस्सा जो एक तरफ से खुलता आ ची हवा से इधर-उधर उड़ रहा था। जिससे उसकी काली जांघं दिख रही भी। नेहा समझ नहीं पा रही थी के राज उसकी तरफ क्यों आ रहा है?

बड़े घर की बहू को प्यार मैं फंसा कर चोदा

नेहा- इधर क्यों आ रहे हो?

राज कुछ नहीं बोलता और उसकी तरफ बढ़ते रहता है। वो नेहा के नजदीक पहुँच कर- “मालकिन आपकी साड़ी पर कुछ रेंग रहा है..”

नेहा को छोटे कीड़े मकोड़ों से इर लगता था। राज की बात सुनकर नेहा- “आआआ… क्या है ओहह..” और नेहा इरते हुए इधर-उधर अपनी साड़ी झटकने लगती हैं।
असल में वहाँ कुछ नहीं था ये सब राज का प्लान था।

नेहा- किधर है?

राज- मालकिन इधर आइए मैं निकाल देता हूँ।

नेहा उसके इर में बिना कुछ सोचे राज के पास चली जाती है। राज लेहा के अपने पास आते ही उसकी कमर में हाथ डालकर अपनी तरफ खींचता है। दोनों एक दूसरे के बेहद करीब थे। नेहा की बड़ी बड़ी चूचियां इस वक्त राज की छाती से दबी हुई थीं। नेहा लेकिन काड़े के इर में भी। उसे कुछ भी होश नहीं था की वो इस बङ्गत एक गंदे लारीवाले बूढ़े की बाहों में है। एक खूबसूरत औरत जो इस घर की बहू है वो एक गंदे लारीवाले काले बूढ़े से चिपकी हुई थी।

राज- इरिये मत मालकिन, में अभी कीड़ा निकाल देता है।

नेहा- ही जल्दी निकालो।

राज अब अपने हाथ नेहा की पीठ पर चलाने लगता है। उसको नेहा के गोरे जिम से मदहोश कर देने वाली खुश्बू आ रही थी। राज अब अपने काले हाथ नेहा की गाण्ड पर धीरे से रख देता है।

राज मन में- “क्या गाण्ड हैं साली की। नेहा मेरी जान तेरी गाण्ड तो मस्त हैं। मेरा लौड़ा मरा जा रहा है इसमें जाने के लिए। तेरी गाण्ड तो में ऐसा मागंगा को त चलने के लायक नहीं बचेगी..”

राज ऐसा सोचते हुए एक बार नेहा की गाण्ड दबाता है हल्के से। नेहा चुपचाप वैसे ही खड़ी थी। इसी बीच राज का काला मोटा लण्ड उसकी लुंगी में खड़ा हो चुका था। जो अब नेहा को अपने आगे से चुभ रहा था। इस पोजीशन में उसका लण्ड नेहा को साड़ी के ऊपर से चूत पर चुभ रहा था। नेहा इससे ओड़ा नीचे देखती है। वो देखती हैं की राज की लंगी में एक बड़ा सा तंब बना हुआ है। और वो तंब उसके आगे से चभ रहा है। नेहा को अहसास होता है कि वो क्या है?

नेहा तभी राज से दूर हटने लगती है। तभी राज फिर से नेहा की कमर में हाथ डालते हुए उसे अपनी तरफ खींचता है। इस बार दोनों के चेहरे आमने सामने थे। नेहा का खूबसूरत चेहरा राज के काले बदसरत चेहरे के सामने था। नेहा के मुँह से एक भी शब्द नहीं निकल रहा था। राज के हाथ नेहा की कमर को जकड़े हुए थे। जिसकी वजह से नेहा हिल भी नहीं पा रही थी। नेहा लगातार राज को देख रही थी। सवालों भरे चेहरा से।

इतनी देर तक देखने के बाद अब राज नेहा की आँखों में देखते हुए उसके गुलाबी होंठों की तरफ अपने काले सूखे हुए होंठ बढ़ाने लगता है। नेहा के लिए बिल्कुल अनएक्सपेक्टेड था। एक काला बूदा ट्रक ड्राइवर उसको किस करने की कोशिश कर रहा था। राज के होठ नजदीक आते ही नेहा अपने हाथ बीच में लाती है, जिसकी वजह से राज के काले होंठ एक बार नेहा के गोरे हाथों को चूमते हैं। नेहा अपना हाथ जल्दी से हटा लेटी है। नेहा फिर एकदम से राज की पकड़ से निकलती हैं, और बाहर भाग जाती है।

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