बहन की ननद की धमाकेदार चुदाई- Cousin Sex Stories

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मेरी बहन सुमन घर आई हुई थी उसके साथ उसके दोनों बच्चे भी थे मैंने सुमन को कहा सुमन अभी तो मैं ऑफिस के लिए निकल रहा हूं लेकिन तुमसे शाम को मुलाकात करता हूं।

सुमन मुझे कहने लगी ठीक है भैया आप शाम को मुझसे मिल लीजिएगा और फिर मैं अपने ऑफिस के लिए निकल गया मैं अपने ऑफिस के लिए निकल चुका था लेकिन उस दिन रास्ते में मेरी मोटरसाइकिल का टायर पंचर हो गया जिस वजह से मुझे अपने ऑफिस पहुंचने में देरी हो गई थी।

मैं अपने ऑफिस पहुंचा तो मेरे मैनेजर ने मुझसे ना जाने कितने ही सवाल पूछ लिए, मैंने उनके सवालों का जवाब दिया और उसके बाद मैं अपना काम करने लगा शाम के 5:00 बज चुके थे और मेरी नजर हमारे ऑफिस के दीवार पर टंगी हुई बड़ी सी घड़ी पर थी मैं उसे ही बार-बार देख रहा था और सोच रहा था कि कब समय होगा और कब मैं घर जाऊं क्योंकि अपनी बहन सुमन से मैं काफी समय से नहीं मिल पाया था इसलिए उसके साथ मैं कुछ समय बिताना चाहता था।

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अब मैं अपने ऑफिस के लिए घर निकल चुका था और जब मैं घर पहुंचा तो मैंने देखा पापा मम्मी और मेरी बहन साथ में बैठे हुए हैं और बच्चे वहीं बैठक में खेल रहे थे वह अपने खिलौनों के साथ खेलने में इतने व्यस्त थे कि उन्हें किसी का भी ध्यान नहीं था।

मैंने मां से कहा मां मेरे लिए तुम चाय बना दो तो सुमन मुझे कहने लगी भैया मैं आपके लिए चाय बना कर लाती हूं और सुमन रसोई में चली गयी। सुमन जब रसोई में गई तो वह मेरे लिए चाय बनाने लगी और थोड़ी देर बाद वह चाय बना कर ले आई सुमन ने सब लोगों के लिए चाय बना दी थी और हम सब चाय पीते हुए आपस में बात कर रहे थे।

मैंने सुमन से पूछा कि सुमन तुम काफी दिनों बाद घर आई हो तो वह कहने लगी कि हां भैया आपको तो पता ही है कि सुमित कितने ज्यादा बिजी रहते हैं और उनके पास बिल्कुल भी समय नहीं होता इस वजह से मैं घर नहीं आ पाई थी लेकिन अब मैं कुछ दिनों के लिए यहीं रुकने वाली हूं और बच्चों की भी स्कूल की छुट्टियां है इसलिए मैं आप लोगों के साथ कुछ अच्छा समय बिताना चाहती हूं।

मैंने सुमन को कहा सुमित की जॉब कैसी चल रही है सुमन कहने लगी भैया सुमित की जॉब अच्छी चल रही है। सुमित सुमन के पति का नाम है और सुमन और सुमित दोनों ही एक साथ कॉलेज में पढ़ा करते थे और उन दोनों ने शादी करने का फैसला कर लिया था मम्मी पापा को भी इस बात से कोई आपत्ति नहीं थी क्योंकि सुमित एक अच्छे परिवार से है सुमित के पिताजी एक बड़े अधिकारी रह चुके हैं सुमित भी अच्छी कंपनी में जॉब करता है।

सुमन अपनी शादीशुदा जीवन से बहुत खुश थी तो सुमन मुझसे कहने लगी कि भैया भाभी कब अपने मायके से लौट रही हैं तो मैंने सुमन को कहा अभी तो तुम्हारी के आने की फिलहाल कोई उम्मीद नहीं है वह कुछ दिनों बाद आएगी। मैं और सुमन आपस में बात कर रहे थे और पापा मम्मी भी सुमन से बात कर रहे थे लेकिन उसी वक्त डोर बेल बजी और जब डोर बेल बजी तो मैंने दरवाजा खोल कर देखा कि दरवाजे पर कौन है तभी मैंने देखा पड़ोस की आंटी दरवाजे पर थी और वह मम्मी से मिलने के लिए आई हुई थी।

जब वह घर के अंदर आए तो वह मम्मी के साथ बात करने लगी और वह सुमन से भी बात कर रही थी मैं अपने रूम में चला गया। मैं जब अपने रूम में गया तो कुछ देर मैं रूम में टीवी देख रहा था और जब वह आंटी चली गई तो उसके बाद रात के डिनर की तैयारियां मां और सुमन करने लगे। हम सब लोगों ने रात में डिनर किया और उसके बाद हम सब छत में काफी देर तक साथ में बैठे हुए थे।

सुमन और मैं अपने बचपन की कुछ यादों को ताजा कर रहे थे सुमन ने मुझसे कहा कि भैया बचपन में हम लोग कितनी मस्ती किया करते थे और जब भी पापा मुझे डांटते थे तो आप ही मुझे हमेशा बचाते थे। मैंने सुमन को कहा वह दिन तो मुझे हमेशा ही याद आते हैं हम दोनों आपस में बात कर रहे थे कि तभी मेरी पत्नी का फोन आया मेरी पत्नी माधुरी जो कि अपने मायके में थी वह मुझे कहने लगी कि रोहन आपने मुझे दो दिनों से फोन नहीं किया मुझे लगा आप बिजी होंगे इस वजह से मैंने भी आपको फोन नहीं किया।

मैंने माधुरी को कहा माधुरी मुझे समय नहीं मिल पाया था और आज सुमन घर पर आई हुई है इसलिए सुमन के साथ समय का कुछ पता ही नहीं चला। मैं और माधुरी बात कर रहे थे तो मैंने माधुरी से कहा कि माधुरी मैं तुम्हें कल फोन करता हूं माधुरी कहने लगी ठीक है। मैंने फोन रख दिया था और मैं सुमन के साथ बात कर रहा था सुमन मुझे कहने लगी कि मेरी ननद बिल्कुल भी ठीक नहीं है।

सुमन की ननद का डिवोर्स हो चुका है और वह उन लोगों के साथ ही घर पर रहती है सुमन की ननद का नाम सुनीता है सुनीता का व्यवहार बिल्कुल भी ठीक नहीं है जब मुझे सुमन ने यह बात बताई तो मैंने सुमन को कहा क्या वह तुम्हारे साथ अच्छे से बात नहीं करती।

सुमन कहने लगी कि नहीं भैया सुनीता के दिल में ना जाने क्या चलता रहता है वह तो चाहती है कि मेरे और सुमित के बीच भी हमेशा झगड़े ही होते रहे और कई बार सुनीता की वजह से हम दोनों के बीच झगड़े हुए। मैंने सुमन को कहा क्या सुनीता दूसरी शादी नहीं करना चाहती तो सुमन मुझे कहने लगी कि भैया वह दूसरी शादी नहीं करना चाहती पहले भी उसकी शादी कुछ अच्छी नहीं चल पाई।

सुनीता की शादी को हुए सिर्फ 6 महीने ही बीते थे कि उसके पति और उसके बीच झगड़े शुरू हो गए और उन दोनों का जल्द ही डिवोर्स हो गया उन दोनों के झगड़े के पीछे की वजह तो मुझे भी नहीं पता लेकिन सुमन ने मुझे इस बारे में बताया कि सुनीता और उसके पति के बीच किसी लड़के को लेकर झगड़ा था जिस वजह से उसके पति सुनीता से बहुत ही नाराज थे।

सुमन और मैं साथ में बैठे हुए थे सुमन कहने लगी कि भैया अब मुझे नींद आ रही है और सुमन सोने के लिए चली गई। मैं पापा और मम्मी हम लोग काफी देर तक वहां बैठे रहे रात भी काफी हो चुकी थी और मैं भी अपने बेडरूम में सोने के लिए चला गया। अगले दिन जब सुबह मैं उठा तो मुझे ऑफिस के लिए जाना था और मैं जल्दी से तैयार होकर अपने ऑफिस के लिए मैं निकल चुका था।

मैं अपने ऑफिस पहुंचा तो उस दिन मेरे दोस्त ने मुझे बताया कि उसकी शादी कुछ समय बाद होने वाली है मैंने उससे कहा कि चलो यह तो बड़ी खुशी की बात है कि तुम्हारी शादी होने वाली है। अंकित हमारे ही ऑफिस में काम करता है और अंकित ने मुझे अपनी शादी का कार्ड देते हुए कहा कि तुम्हें मेरी शादी में जरूर आना है मैंने अंकित को कहा हां मैं तुम्हारी शादी में जरूर आऊंगा।

हर रोज की तरह उस दिन भी मेरा दिन पता नहीं कैसे कटा मुझे पता ही नहीं चला। अब मैं अपने घर के लिए लौट रहा था जब मैं अपने घर के लिए लौट रहा था तो मेरी मां का मुझे फोन आया और वह कहने लगी कि बेटा आते वक्त तुम सुमन को भी ले आना। मैंने मां से कहा सुमन कहां है तो मां कहने लगी कि वह कुछ शॉपिंग करने गई थी तुम उससे फोन पर बात कर लेना।

मैंने सुमन को फोन किया तो सुमन ने भी उस समय शॉपिंग कर ली थी उसके बाद मैं उसे लेकर घर चला आया। उस दिन मैं दीपक के साथ बैठी हुई थी तो मुझे बहुत अच्छा लग रहा था। मैं सुमन को अपने साथ घर ले आया था।

उसके कुछ दिन बाद सुमन अपने ससुराल चली गई मैं उसे छोड़ने के लिए गया था। वहां पर मेरी मुलाकात सुनीता के साथ हुई वह मुझसे बातें करने लगी उस दिन मुझे लगा सुनीता का चरित्र ही ठीक नही है उसके पति के साथ डिवोर्स का मुख्य कारण यही होगा इसी वजह से तो सुनीता मुझ पर भी डोरे डालने लगी थी।

मुझे क्या पता था सुनीता मुझे फोन कर के भी परेशान करने लगेगी वह मुझे रोज फोन किया करती लेकिन मैंने भी उससे मिलने के लिए बुला ही लिया। जब वह मुझे मिली तो मैं उस दिन बहुत ही ज्यादा खुश था और मै उसे चोदना चाहता था। मैंने उसे कहा तुमने मेरे अंदर की गर्मी को पूरा बढ़ा दिया था जब सुनीता और मैं मेरे एक दोस्त के घर पर गए तो वहां पर उस वक्त कोई भी नहीं था।

सुनीता मेरी बाहों में थी मैंने उसे अपनी गोद में लेते हुए जब उसके स्तनों को दबाना शुरू किया और उसे अपने नीचे लेटा कर उसके नरम और पतले होठों को मै चूमने लगा तो वह मुझे कहने लगी मुझे बहुत ही मजा आ रहा है।

मैं उसके होठों का रसपान बहुत देर तक करता रहा वह कहने लगी मुझे ऐसा लग रहा है जैसे मैं बिल्कुल भी रहा नहीं पाऊंगी और उसके अंदर की गर्मी इस कदर बढ़ चुकी थी उसने मेरे लंड को अपने हाथों में ले लिया और वह उसे हिलाने लगी।

वह मेरे लंड को हिला रही थी तो मुझे भी बड़ा मजा आ रहा था उसके अंदर की गर्मी इस कदर बढ़ गई कि उसने मुझे कहा मैं अब बिल्कुल भी रह नहीं पाऊंगी। मैंने उसकी चूत के अंदर अपना लंड घुसा दिया और जैसे ही मैंने अपने लंड को उसकी चूत के अंदर प्रवेश करवाया तो वह मुझे कहती थोड़ा और तेजी से मुझे चोदते रहो।

मैंने उसके दोनों पैरों को अपने कंधो पर रखा और अपने लंड को उसकी चूत के अंदर बाहर करने लगा थोड़ी देर बाद उसकी सिसकियो में बढ़ोतरी होने लगी थी और उसकी सिसकियां अधिक होने लगी। वह मुझे कहने लगी लगता है मैं अब ज्यादा देर तक अपने आपको रोक नहीं पाऊगी।

मैंने उसे कहा मुझे तो बहुत ही ज्यादा मजा आ रहा है उसकी चूत के अंदर बाहर अपने लंड को करता रहा। मैंने जब उसको कहा मेरा वीर्य बाहर निकलने वाला है तो उसने मुझे कहा तुम अपने वीर्य को मेरे मुंह के अंदर ही गिरा दो। जब उसने अपने मुंह को खोला तो मैंने अपने लंड को उसके मुंह के अंदर डाल दिया, जब मैंने उसके मुंह के अंदर वीर्य डाला तो मुझे बहुत ही अच्छा लगा जिस प्रकार से मैंने उसके मुंह के अंदर अपने वीर्य को गिराया।

उसके बाद तो सुनीता मेरे लिए पूरी तरीके से पागल हो चुकी थी जब उसे मेरी जरूरत पड़ती तो वह मुझे बुला लिया करती और मैं उसके साथ सेक्स कर के बहुत ही खुश हूं। यह बात सिर्फ हम दोनों तक ही है और वह मुझे पूरी तरीके से खुश करने की कोशिश करती है।

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