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दिव्या दीदी की शादी कुछ समय पहले ही हुई थी और उनकी शादी पापा मम्मी ने बड़े धूमधाम से करवाई उनकी शादी में पापा ने किसी भी प्रकार की कोई कमी नहीं रखी। दिव्या दीदी अपने पसंद के लड़के से शादी कर के बहुत खुश थी दिव्या दीदी की मुलाकात रजत से दो वर्ष पहले हुई थी।

वह दोनों एक दूसरे को पसंद करते थे लेकिन दिव्या दीदी ने घर पर यह बात किसी को भी नहीं बताई थी परंतु जब उन्होंने एक दिन यह बात मम्मी को बताई तो मम्मी गुस्सा जरूर थी लेकिन जब पापा से दीदी ने इस बारे में बात की तो पापा ने दीदी को कहा कि कोई बात नहीं बेटा जैसा तुम्हें अच्छा लगता है हम लोग तुम्हारी वहां शादी करवा देंगे।

उसके बाद वह रजत से मिले पापा मम्मी को रजत बहुत पसंद आया और उन्होंने दीदी की सगाई रजत से करवाने का फैसला कर लिया था। अब उन दोनों की सगाई हो चुकी थी और कुछ समय बाद शादी भी हो गई थी शादी बड़ी ही धूमधाम से हुई थी।

शादी में मेरी मुलाकात रजत के ही कजन भाई दिव्यांशु से हुई जब मैं दिव्यांशु से मिली तो मुझे उससे मिलकर अच्छा लगा। दिव्यांशु एक मल्टीनेशनल कंपनी में मैनेजर के पद पर हैं लेकिन मैं दिव्यांशु के बारे में ज्यादा कुछ नहीं जानती थी परंतु मुझे उनसे मिलकर अच्छा लगा और हम दोनों एक दूसरे के लिए समय निकालने लगे थे।

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हम दोनों की आपस में नजदीकियां बढ़ने लगी थी दिव्यांशु का साथ पाकर मैं खुश थी यह बात मैंने दिव्या दीदी को भी बता दी थी। जब उन्हें मैंने दिव्यांशु के बारे में बताया तो वह लोग खुश हो गए और कहने लगे कि तुम पापा से दिव्यांशु के बारे में बात कर लो लेकिन मैं चाहती थी कि मैं अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद डॉक्टर बन जाऊं।

मैं अभी एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही थी इसीलिए मैं थोड़ा समय चाहती थी दिव्यांशु को भी इससे कोई एतराज नहीं था दिव्यांशु के परिवार ने मुझे स्वीकार कर लिया था और पापा मम्मी को भी मेरे और दिव्यांशु के रिश्ते के बारे में सब कुछ पता चल चुका था।

उन्हें मेरे और दिव्यांशु के रिश्ते से कोई आपत्ति नहीं थी पापा मम्मी बहुत खुले विचारों के हैं हालांकि मम्मी कभी-कभार अपनी रूढ़िवादी सोच को जरूर हम लोगों के सामने रख दिया करती हैं लेकिन पापा बड़े ही बिंदास और खुले विचारों के हैं।

पापा ने हमारे ऊपर कभी भी कोई पाबंदी नहीं डाली और ना ही वह हमे कभी कोई बंदिश में डालना चाहते हैं। मैंने जब पापा से कहा कि पापा जब मेरी पढ़ाई पूरी हो जाएगी उसके बाद मैं दिव्यांशु से शादी कर लूंगी तो पापा ने कहा कि बेटा तुम्हे जितना समय चाहिए उतना समय तुम ले लो और तुम्हें जैसा ठीक लगता है तुम वैसा ही करो।

दिव्यांशु और मेरे बीच रिश्ते बहुत अच्छे थे लेकिन उसी दौरान मेरी मुलाकात ललित के साथ हुई ललित एक मध्यमवर्गीय परिवार का रहने वाला एक सामान्य से लड़का था लेकिन उसके अंदर कुछ तो बात थी कि मैं ललित से भी बातें करने लगी थी।

ललित मुझे दिल ही दिल चाहने लगा था उसने मुझे यह बात कभी बताई तो नहीं थी लेकिन मुझे भी लगता था कि ललित मुझे पसंद करता है। मैंने ललित को एक दिन पूछ ही लिया तो वह मुझे कहने लगा कि मैं तुम्हें बहुत पसंद करता हूं ललित की बातें मुझे बहुत अच्छी लगती थी।

दिव्यांशु और ललित के बीच में मैं फसी हुई थी मुझे कुछ भी समझ नहीं आ रहा था एक तरफ दिव्यांशु थे और मैं दिव्यांशु से पहले मिली थी तो दिव्यांशु मेरा बहुत ख्याल रखते थे लेकिन कुछ समय से वह बहुत ही ज्यादा बिजी रहने लगे थे और उनके पास मेरे लिए बिल्कुल भी समय नहीं हो पाता था ललित के पास हमेशा मेरे लिए समय होता था।

मैंने जब दिव्या दीदी से इस बारे में बात की तो दिव्या दीदी कहने लगी देखो प्रिया इसमें तो मैं कुछ भी नहीं कह सकती हूं क्योंकि यह फैसला तुम्हें ही लेना है यदि तुम ललित के साथ अपना जीवन बिताना चाहती हो तो तुम्हें दिव्यांशु को सब कुछ सच बताना पड़ेगा।

मैंने दिव्या दीदी से कहा लेकिन दीदी मेरे अंदर इतनी हिम्मत नहीं है कि मैं दिव्यांशु को सब कुछ सच बता पाऊं। मुझे भी लगने लगा था कि शायद मैं ललित से प्यार करने लगी हूं पता नहीं यह बदलाव कैसे मेरे अंदर आया लेकिन यह बदलाव बड़ी जल्दी आया और सब कुछ बहुत जल्दी में हुआ।

मैं सोच भी नहीं पाई कि ऐसा कभी हो भी सकता है लेकिन दिव्यांशु और मेरे बीच अब कुछ भी नहीं था, ना ही मैं दिव्यांशु को प्यार करती थी और ना ही दिव्यांशु के पास मेरे लिए समय था। उसी दौरान मैंने दिव्यांशु से इस बारे में बात की तो वह मुझ पर गुस्सा हो गए और कहने लगे कि प्रिया यदि ऐसा था तो तुमने मुझे पहले क्यों नहीं बताया।

मैंने दिव्यांशु से इस बात के लिए माफी मांगी और कहा कि मुझे वाकई में पता नहीं था मैं कुछ समझ नहीं पा रही थी। दिव्यांशु मुझ पर बहुत गुस्सा हुए लेकिन वह मुझे कहने लगे कि यदि तुम मुझसे प्यार नहीं करती हो तो अब मैं इसमें कुछ भी नहीं कर सकता हूं और ना ही मेरे बस में कुछ है तुम्हें जैसा ठीक लगता है तुम वैसा ही करो।

दिव्यांशु ने मुझे माफ कर दिया था और मैं ललित के साथ अब रिलेशन में थी हम दोनों बहुत ही खुश थे मुझे ललित का साथ मिल चुका था और मुझे ललित के साथ बहुत ही अच्छा लगता था। मुझे ललित के साथ इतना अच्छा लगता कि मैं हमेशा ही ललित से कहती कि जब भी मैं तुम्हारे साथ रहती हूं तो मुझे कुछ पता ही नहीं चलता कि कब शाम हो गई है।

मेरी पढ़ाई भी अब पूरी होने वाली थी और ललित के साथ भी मुझे अच्छा लगता था हम दोनों साथ में ही ज्यादा समय बिताते थे। ललित एक दिन मुझे कहने लगा कि मुझे तुम्हें अपने साथ घुमाने के लिए लेकर जाना है। मैंने ललित को कहा क्यों नहीं हम लोग घूमने के लिए साथ में चलेंगे मुझे अमित के साथ कहीं भी जाने से कोई परेशानी नहीं थी।

जब ललित मुझे अपने साथ घुमाने के लिए लेकर गया तो उस दिन हम दोनों बड़े अच्छे से एक दूसरे के साथ इंजॉय कर रहे थे और हम दोनों के बीच पहला लिप किस भी हो गया यह पहली बार ही था। मैं जब घर आई तो मैंने उस दिन फोन पर ललित से बहुत देर तक बात की ललित से फोन पर बात करना अच्छा लगा, वह मुझे कहने लगा कि आज हमारे बीच में जो कुछ भी हुआ है वह बड़ा ही अच्छा था वह अपने और मेरे बीच हुए लिप किस की बात करने लगा।

मैंने ललित को कहा मैंने पहली बार ही किसी के होठों को किस किया तो ललित कहने लगा क्या तुमने पहली बार ही किसी के साथ किस किया था? मैंने उसे कहा हां मेरा पहली बार ही था लेकिन ललित ने मुझसे कहा कि हम लोग आज के बाद क्या हमेशा किस कर सकते हैं। मैंने उसे कहा हां क्यों नहीं और उसके बाद मैं और ललित एक दूसरे को हमेशा ही लिप किस कर दिया करते थे लेकिन एक दिन किस करते हुए हम दोनों की गर्मी कुछ ज्यादा ही बढ़ने लगी।

ललित ने मेरे स्तनों को दबाना शुरू किया और धीरे-धीरे उसने मेरी योनि को भी दबाना शुरू किया। जैसे ही उसने अपने हाथ को मेरी पैंटी के अंदर डालते हुए मेरी चूत को सहलाना शुरू किया तो मैं अपने आपको रोक ना सकी और ललित ने मुझे जमीन पर लेटाते हुए किस करना शुरू किया। जब उसने मेरे कपड़ों को उतारकर मेरे स्तनों को अपने मुंह में लेना शुरू किया तो मेरी चूत से कुछ ज्यादा ही पानी बाहर निकलने लगा और मैं पूरी तरीके से उत्तेजित होने लगी मुझसे बिल्कुल भी रहा नहीं जा रहा था और ना ही ललिता अपने अंदर की गर्मी को रोक पा रहा था परंतु जैसे ही मैंने ललित से कहा कि क्या तुम मेरी चूत को चाटोगे?

वह कहने लगा हां मे तुम्हारी चूत को चाट लेता हूं ललित ने मेरी चूत को बहुत देर तक चाटा और उसने मेरी चूत से पानी बाहर निकाल कर रख दिया। मैंने ललित से कहा मुझसे बिल्कुल नहीं रहा जा रहा है तो ललित कहने लगा थोड़ी देर तुम मेरे लंड को अपने मुंह में लो।

मैं ललित की बातों को मना ना कर सकी और उसके मोटे लंड को मैंने मुंह मे लेना शुरू किया तो मुझे भी अच्छा लगने लगा काफ़ी देर तक मैं उसके लंड को अपने मुंह में लेती रही और मुझे बड़ा अच्छा भी महसूस हुआ। हम दोनों ही बहुत खुश थे और बहुत ज्यादा उत्तेजित भी हो गए हम दोनों के बदन से गर्मी बाहर निकलने लगी थी और जैसे ही मैंने ललित के लंड को चूत पर लगाया तो उसने अंदर की तरफ धक्का दिया और जैसे ही उसने मुझे धक्का दिया तो मेरी चूत से खून का बहाव तेज होने लगा और बड़ी तेजी से मेरे चूत के अंदर अपने लंड को अंदर बाहर करने लगा।

मुझे बहुत अच्छा लगा और उसे भी बड़ा अच्छा लग रहा था उसने मेरे दोनों पैरों को अपने कंधों पर रख लिया वह जिस प्रकार से मुझे धक्के देता तो उस से मेरे मुंह से चीख निकल जाती। मैं बहुत ही ज्यादा उत्तेजित होने लगी मैंने ललित से कहा मेरी चूत से कुछ ज्यादा ही खून बाहर आ रहा है।

वह कहने लगा हां तुम्हारी चूत से कुछ ज्यादा ही खून बाहर की तरफ निकलने लगा है। वह अब भी मुझे वैसे ही धक्के मार रहा था मेरी चूत का ललित बहुत मजा ले रहे थे काफी देर तक उसने ऐसे ही धक्का मारा। जब उसने अपने वीर्य को मेरे स्तनों के ऊपर गिराया तो मैंने ललित से कहा आज तो तुमने मुझे अपना बना लिया।

ललित मुझे कहने लगा तुम तो मेरी अपनी ही हो भला तुम मुझे छोड़कर कहां जाओगे। हम दोनों एक दूसरे को लिप किस करने लगे और हम दोनों ने बहुत देर तक एक दूसरे के होठों को चूसा। उसके बाद तो जैसे यह सब आम होने लगा और कुछ दिनों पहले ललित ने मेरी गांड मारने की कोशिश की तो हम लोग उसमे नाकामयाब रहे परंतु अब भी हम लोगों ने यह कोशिश जारी रखी है कब ललित मेरी गांड मार पाएगा।

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