लंड टन टना चूत चम चमा- Hindi Sex Stories

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मैं एक इंजीनियर हूं और मैं झारखंड के एक छोटे से गांव में प्रोजेक्ट को लेकर काम कर रहा था। जब उस दौरान एक दिन मैं काम कर रहा था तो मैंने देखा कि सामने से एक लड़की घड़े में पानी लेकर आ रही थी वह दिखने में बेहद ही खूबसूरत थी। उसको देख कर मुझे तो ऐसा लग रहा था जैसे कि मैं उसे कब से जानता हूं मैंने उस लड़की को पहली बार ही वहां देखा था मैंने उससे पहले उसे कभी नहीं देखा था लेकिन उसके बाद से मैं अक्सर उसे वहां पर देखने लगा।

जब भी मैं उसे देखता तो मुझे उसे देखर बहुत ही अच्छा लगता और मैं उससे बात करना चाहता था। एक दिन मैं उस लड़की को देख रहा था तो वहां पर मेरे साथ काम करने वाले जूनियर इंजीनियर ने मुझे कहा कि सर आप उसे मत देखिए। मैंने उसे कहा कि लेकिन ऐसा क्यों तो वह कहने लगा कि वह यहां के सरपंच की लड़की है और अगर उन्हें इस बारे में पता चला तो कहीं हमारे साथ कुछ बुरा ना हो जाए।

मैंने उसे कहा की वह मुझे बहुत अच्छी लगने लगी है क्या तुम उसके बारे में मुझे कुछ पता कर के बता सकते हो तो उसने मुझे कहा कि नहीं रहने दीजिए सर मैं आपको उसके बारे में कुछ भी नहीं बता पाऊंगा। मैं तो चाहता था कि मैं उससे बात करूं लेकिन मुझे उसका नाम भी पता नहीं था वह तो जैसे मेरे दिल और दिमाग में बस चुकी थी।

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कुछ दिनों में हमारी साइट का भी काम पूरा होने लगा था और मुझे वापस दिल्ली लौटना था। जब हमारी कंपनी का काम खत्म हो गया तो मैं दिल्ली लौट आया दिल्ली लौटने के बाद भी मैं उस लड़की के बारे में सोचता रहा और मेरे दिमाग में बस उस लड़की का ही ख्याल आ रहा था।

मैं चाहता था कि मैं उससे बात करूं इसलिए मैं दिल्ली से कुछ दिनों के लिए झारखंड चला गया मैंने अपना पूरा मन बना लिया था कि मैं उससे बात कर के ही रहूंगा। मैंने जब उससे बात की तो वह शरमा रही थी मैंने उससे पूछा कि आपका नाम क्या है तो उसने मुझे अपना नाम बताया उसका नाम ललिता है। ललिता और मैं बात कर रहे थे तो उसके पिताजी ने हम दोनों को बात करते हुए देख लिया और वह ललिता का हाथ खींचते हुए अपने घर लेकर चले गए।

मैंने तो उस दिन सोच लिया था कि मैं अब ललिता को अपना बनाकर ही मानूंगा। मैंने उसके बाद ललिता से फिर बात करने की कोशिश की लेकिन उसके पिताजी कभी चाहते ही नहीं थे की मैं उससे बात करूं। एक दिन ललिता ने मुझे कहा कि देखो तुम यहां से चले जाओ अगर मेरे पापा और मेरे भैया को इस बारे में पता चला तो कहीं वह लोग तुम्हें कुछ नुकसान ना पहुंचा दे इसलिए तुम यहां से चले जाओ।

मुझे भी लगा कि ललिता ठीक कह रही है उसके बाद मै दिल्ली वापस लौट आया था मैंने उसके बाद ललिता से फोन पर बात करनी शुरू कर दी हम दोनों की बातें फोन पर ही होती थी। ललिता को अपने घर वालो से छुप कर मुझसे बातें करनी पड़ती थी लेकिन मैं चाहता था कि ललिता और मैं अब एक दूसरे के साथ रहे परन्तु यह सब इतना आसान भी नहीं था।

ललिता एक गांव की भोली भाली लड़की थी और मैं उसे भला शादी के लिए कैसे मनाता ललिता और मेरे बीच का प्यार तो परवान चढ़ चुका था। हम दोनों सिर्फ फोन पर ही बातें किया करते थे और उसके पिताजी को मनाना भी इतना आसान नहीं था। मैंने ललिता को कहा कि हम लोग घर से भाग चलते हैं लेकिन ललिता ने मना कर दिया वह कहने लगी तुम्हें मेरे पिताजी को समझाना पड़ेगा उसी के बाद वह हमारी शादी करवा पाएंगे।

मेरे लिए यह सब इतना आसान नहीं था और ना ही ललिता के लिए यह आसान था हम दोनों एक दूसरे से अलग नही रहना चाहते थे। मैंने तो अपने घर में सबको ललिता के बारे में बता दिया था मेरे पापा मुझे कहने लगे बेटा अगर हम लोगों को ललिता के पापा से बात करनी है तो हम लोग उनसे बात करने के लिए तैयार है।

मैंने अपने पिताजी को कहा कि नहीं आप रहने दीजिए मैं ललिता के पापा को किसी भी प्रकार से समझा लूंगा। उसके बाद मैं ललिता के गांव चला गया जब मैं उनके गांव गया तो वहां पर उस दिन मैं ललिता के पापा से मिला ललिता के पिता जी से मिलकर मुझे ऐसा लग रहा था कि जैसे वह मेरी बात नहीं मानेंगे। उन्होंने मुझे कहा कि देखो बेटा हमने ललिता को हमेशा ही बड़े नाजो से पाला है लेकिन हम उसकी शादी ऐसे ही किसी के साथ भी नहीं कर सकते हमें तुम्हारे बारे में कुछ भी पता नहीं है।

मैंने उन्हें कहा कि ऐसा कुछ भी नहीं है आप लोग बिल्कुल भी चिंता मत कीजिए मैं ललिता का पूरा ध्यान रखूंगा लेकिन ललिता के पिताजी चाहते थे कि पहले वह मेरे परिवार से मिले। मुझे तो लगा था कि वह मुझसे बात भी नहीं करेंगे लेकिन उन्होंने मेरी बात अच्छे से सुनी और उसके बाद मैं दिल्ली लौट आया।

मैंने जब यह बात अपने पापा और मम्मी का बताई तो वह लोग भी खुश हो गए। मेरे पापा मम्मी की खुशी सिर्फ मेरी खुशी में है और वह लोग हमेशा से ही मुझे खुश देखना चाहते हैं इसलिए तो मुझे जब भी मेरे पापा मम्मी की जरूरत होती है तो सबसे पहले वह लोग मेरे साथ होते हैं।

मुझे बहुत ही अच्छा लगता है जब मेरे पापा मम्मी मेरे साथ होते हैं अब उन्होंने भी ललिता को अपनी बहू के रूप में स्वीकार कर लिया था। मेरे पापा मम्मी को अब ललिता के पिता जी से मिलना था और हम लोग जब ललिता के घर पर गए तो मेरी मां ने ललिता को देखा और उन्होंने ललिता को देखते ही कहा ललिता बहुत ही अच्छी लड़की है। उसके बाद मेरे पिताजी और ललिता के पिताजी की बात हुई तो सब लोगों की रजामंदी से हम दोनों की शादी तय हो गई।

उन लोगों को भी हमारा रिश्ता मंजूर था पहले तो मुझे लगा था कि शायद यह रिश्ता कभी हो ही नहीं पाएगा और यह सब इतनी आसानी से नही होगा लेकिन उनकी रजामंदी से ललिता से मेरी शादी होने वाली थी और मैं बड़ा खुश था कि ललिता से मेरी शादी होने वाली है।

मेरे लिए यह किसी सपने के सच होने से कम नहीं था मैंने कभी कल्पना भी नहीं की थी कि ललिता से मेरी शादी हो जाएगी और जल्द ही हम दोनों की शादी हो गई। हम दोनों की शादी हो जाने के बाद ललिता हमारे घर आ चुकी थी। हम दोनों की शादी हो चुकी थी और हम दोनों एक दूसरे के साथ बड़े खुश थे सब कुछ हमारे जीवन में बड़े अच्छे से चल रहा था।

ललिता और मेरे बीच पहली बार सेक्स हुआ तो हम दोनों ने एक दूसरे के साथ सेक्स का पूरी तरीके से मजा लिया था। जब पहली बार हम दोनों ने एक दूसरे के साथ बिस्तर पर अंतरंग संबंध बनाए तो ललिता काफी शर्मा रही थी ललिता को बिल्कुल भी यह सब अच्छा नहीं लग रहा था।

जब मैंने उसके होठों को चूम कर उसे पूरी तरीके से उत्तेजित कर दिया तो वह बिल्कुल भी रह नहीं पा रही थी और उसके अंदर से निकलती हुए गर्मी बहुत ज्यादा बढ़ने लगी थी। मैं जब अपने लंड को बाहर निकाला तो ललिता ने उसे हाथों में लिया। ललिता उसे हिलाने लगी और कहने लगी मुझे बहुत अच्छा लग रहा है।

ललिता ने मेरे लंड को अपने मुंह में लेने के बाद चूसा तो मैं खुश हो गया वह अच्छे से मेरे लंड को सकिंग कर रही थी। मैंने उसके मुंह के अंदर तक अपने लंड को घुसा दिया मेरा लंड उसके मुंह के अंदर जाते ही उसे बड़ा मजा आ रहा था और मेरी गर्मी बढ़ती ही जा रही थी। वह बहुत ज्यादा उत्तेजित हो चुकी थी उसने मुझे कहा मेरे अंदर की गर्मी बहुत ज्यादा बढ़ चुकी है।

अब मैंने उसके होंठों को चूमना शुरू कर दिया जब ललिता की योनि पर मैने अपने लंड को लगाकर अंदर डाला तो वह जोर से चिल्लाई और मुझे कहने लगी मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा है। मुझे भी बड़ा अच्छा लग रहा था उसको भी बहुत ही अच्छा लगने लगा था हम दोनों की गर्मी पूरी तरीके से बढ़ चुकी थी।

मै जिस प्रकार से उसे चोद रहा था उससे उसको मजा आने लगा था ललिता की योनि से निकलता हुआ खून बढने लगा था और उसके अंदर की गर्मी बढ रही थी। वह अपने मुंह से जिस प्रकार की सिसकारियां ले रही थी उससे मेरे अंदर की आग और भी ज्यादा बढ़ रही थी और उसके मुंह से निकलती हुई चीख भी बढने लगी थी। उसकी मादक आवाज में लगातार बढ़ोतरी होती जा रही थी। वह मुझे कहने लगी मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा है उसने मेरा साथ बड़े अच्छे से दिया वह मुझे कहने लगी तुम मुझे ऐसी ही चोदते जाओ।

मैंने उसके पैरों को अपने कंधे पर रख लिया था जिसके बाद वह बिल्कुल भी रह नहीं पा रही थी वह मुझे कहने लगी तुम ऐसे ही मुझे धक्के मारते रहो। मैं उसे लगातार तेज गति से धक्के मारते जा रहा था मेरे अंदर की आग पूरी तरीके से बढ चुकी थी और उसके अंदर की आग बहुत ज्यादा बढ़ चुकी थी।

हम दोनों बिल्कुल भी रह नहीं पा रहे थे ललिता अपने आपको रोक नहीं पा रही थी। वह मुझे कहने लगी आप मुझे ऐसे ही चोदता जाओ। मैंने उसे तेज गति से धक्के देने शुरू कर दिए थे मैंने कुछ देर बाद उसे घोड़ी बना दिया। ललिता कि बड़ी चूतडे मेरी तरफ थी मैं उसे तेज गति से चोद रहा था मैं जिस प्रकार से उसकी चूतडो पर प्रहार करता उससे मुझे बहुत ही ज्यादा मजा आने लगता और उसको भी बड़ा मजा आने लगा था।

वह मुझे कहने लगी तुम मुझे बस ऐसे ही धक्के देते जाओ मैंने उसे बड़ी तेजी से चोदा। जब मैं उसकी चूत पर प्रहार करता तो उसकी चूत से खून निकल रहा था। मैंने जैसे ही उसकी चूत के अंदर अपने माल को गिराया तो वह खुश हो गई। हम दोनों साथ में लेटे हुए थे। हम दोनों की जब मन होता हम दोनों एक दूसरे के साथ सेक्स का मजा ले लिया करते और हम दोनों को ही बड़ा मजा आता जब हम दोनों सेक्स का मजा लिया करते।

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