ऑफिस की सेक्सी लड़की को मस्त घोड़ी बनाकर चोदा | Office Sex Stories

ऑफिस की सेक्सी लड़की को मस्त घोड़ी बनाकर चोदा | Office Sex Stories
Office Sex

मनोहर अपनी कार से नीचे उतरता है और सामने की बिल्डिंग मे जाकर सीधे लिफ्ट के अंदर पहुच कर 4 दबाता है

और कुछ देर मे लिफ्ट 4थ माले पर पहुच जाती है, सामने एक बंदा बैठा हुआ तंबाखू रगड़ रहा था और

मनोहर को देखते ही जल्दी से खड़ा होकर सलाम करता है,

मनोहर-सेठ जी अंदर है,

जी साहेब अंदर ही है, मनोहर सीधे दरवाजा खोल कर अंदर दाखिल होते हुए अरे क्या यार रतन तू यहा ऑफीस

मे घुसा है और मैं दो दिन से ठीक से सो नही पा रहा हू,

रतन- अरे बैठो मनोहर तुम तो हमेशा ही जल्दी मे रहते हो जब कि हमारा काम है बिल्डिंग बनवाना और वह

काम तो आराम से ही होता है,

मनोहर- अरे मैं वह नही कह रहा हू जो तुम समझ रहे हो

रतन- मुस्कुराते हुए, अरे मेरे दोस्त मैं सब समझ रहा हू और मैने तेरा काम भी कर दिया है, अब कुछ देर

तो अपने लंड को संभाल कर रख, अब मैं तेरे लिए रोज-रोज तो 17-18 साल की कुँवारी लोंड़िया चोदने के लिए नही ला

सकता हू ना, फिर भी जुगाड़ करके एक मस्त माल का अरेंज किया है और फिर रतन बेल बजा कर चपरासी को बुलाता

है,

मनोहर- कही तूने उसे पहले ही चोद तो नही दिया

रतन- अरे नही बाबा वह तो मैने तेरे लिए ही बचा कर रखा है, तेरा काम हो गया है अब ज़रा धंधे की बात

कर ले,

मनोहर- बोल क्या करना है

रतन- मेरी तो एक ही इच्छा है और वह काम बस तू ही करवा सकता है

मनोहर-हाँ तो बोल ना

रतन- वो जो तेरा दोस्त मेहता है उसकी एक नई सड़क पर जो ज़मीन है वह कैसे भी मुझे दिलवा दे फिर देख उस

ज़मीन से मैं कहाँ से कहाँ पहुच जाउन्गा,

मनोहर- अबे सपने देखना छ्चोड़ दे मेहता उस ज़मीन को किसी कीमत पर नही बेचेगा

रतन-बेचेगा वह ज़रूर बेचेगा अगर एक बार तू उससे कह दे, मैं जानता हू वह तेरी बात कभी नही टालेगा क्यो कि

उसके उपर तूने एक ही इतना बड़ा एहसान कर रखा है कि वह जिंदगी भर तुझे अपना खुदा मानता रहेगा,

मनोहर- लेकिन रतन मैं इतना ख़ुदग़र्ज़ नही कि उस पर किए एहसान की कीमत मांगू, सॉरी दोस्त कोई और बात होती तो

मैं तेरे लिए कभी मना नही करता पर इस बात के लिए तू मुझे माफ़ कर दे,

तभी कॅबिन के अंदर एक 25 साल की मस्त खूबसूरत लोंड़िया आती है उसने एक स्कर्ट जो उसके घुटनो तक था और उपर एक शर्ट पहन रखा था उसके दूध इतने बड़े और मोटे थे कि मनोहर का तो लंड खड़ा हो गया और जब वह लोंड़िया थोड़ा आगे जाकर पलटी तो उसकी मोटी कसी गांड देख कर मनोहर ने टेबल के नीचे अपना हाथ लेजा कर अपनेलंड को सहलाते हुए उसकी गुदाज गांड देखना शुरू कर दी,

रतन- अरे सपना ज़रा जीवन को फोन लगा कर मेरी बात कर्वाओ

सपना- जी सर

ओर फिर सपना ने जीवन को फोन लगा कर रतन को दिया रतन ने फोन लेकर सपना से कहा ज़रा चपरासी को बोल कर दो कॉफी का बंदोबस्त कर दो,

सपना को जाते हुए मनोहर पीछे मूड कर देखने लगा और उसके भारी फैले हुए चुतडो को बड़ी गौर से

देख-देख कर अपना लंड मसल रहा था,

रतन- ओये बस कर और इधर देख

मनोहर- वाह रतन क्या माल है साले कितनी मस्त लोंड़िया को तूने अपनी पीए बना रखी है,

रतन- बहुत मस्त है क्या

मनोहर- खुदा कसम एक बार तू तो इसकी दिलवा दे साली को रात भर पूरी नंगी करके चोदुन्गा,

रतन- हेलो जीवन शाम को उस लोंड़िया को साथ लेकर मेरे फार्महाउस पर आ जाना

रतन- ले तेरा काम हो गया है और अब शाम को वह अपने ठिकाने पर आ जाएगी,

मनोहर- अरे रतन उसको छ्चोड़ तू तो तेरी इस पीए को एक बार मेरी बाँहो मे भेज दे कसम से कितनी मस्त चुचिया

और गांड है उसकी,

रतन- अबे साले वह मेरी बेटी सपना है और उसने MBआ कर लिया है इसलिए उसे अपने साथ ही बिजनेस मे लगा लिया है

अब मेरे सारे काम को धीरे-धीरे वह संभाल रही है,

मनोहर का मूह एक दम से सुख गया उससे कुछ बोलते नही बन रहा था पर फिर वह रतन को देख कर

मुस्कुराते हुए अपने कान पकड़ कर सॉरी यार मुझे ज़रा भी नही मालूम था कि वह तेरी बेटी है,

रतन- मुस्कुराते हुए इसीलिए तो मैने तेरी बात का बुरा नही माना तभी उनकी कॉफी आ जाती है और मनोहर और

रतन चुस्किया लेने लगते है, मनोहर का लंड अभी तक खड़ा हुआ था तभी सपना एक बार फिर से अंदर आती है

और कुछ फिलो को उठा कर वापस जाने लगती है तभी

रतन-सुनो बेटी

सपना- जी पापा

रतन- ये मेरे खास दोस्त है मनोहर और मनोहर यह मेरी एक्लोति बेटी सपना है

सपना- नमस्ते अंकल

मनोहर नमस्ते बेटा

सपना की नशीली नज़रो और गुलाबी रस से भरे होंठो को देख कर मनोहर का लंड फिर से उसकी पेंट मे तन

चुका था, मनोहर फिर से सपना के हुस्न मे खोने वाला था तभी रतन ने कहा अच्छा सपना बेटी तुम जाओ

मुझे ज़रा मनोहर से कुछ बाते करनी है और फिर सपना वहाँ से चली जाती है,

मनोहर- यार एक बात बता रतन तेरी बेटी की उम्र करीब 25 साल तो होगी और तेरी उम्र को देख कर लगता नही है कि

तेरी कोई 25 बरस की बेटी होगी,

रतन- क्यो भाई मैं भी तो 50 टच करने वाला हू और तू भी साले बुढ्ढा होने की कगार पर ही है

मनोहर- हाँ हाँ ठीक है लेकिन तुझसे तो दो साल अभी छ्होटा ही हू, पर रतन पहले कभी तेरी बेटी को यहाँ देखा

नही,

रतन- मुस्कुराते हुए लगता है तुझे मेरी बेटी बहुत पसंद आई है,

मनोहर- मुस्कुराते हुए नही यार वह बात नही है,

रतन-अच्छा सुन शाम को समय से आ जाना फिर बाकी बाते मेरे फार्महाउस पर ही करेगे,

मनोहर-अच्छा ठीक है और फिर मनोहर वहाँ से उठ कर चल देता है

मनोहर की कार मार्केट के ट्रॅफिक से धीरे-धीरे गुजर रही थी, तभी थोडा आगे रतन को दो मस्त लोंड़िया स्कर्ट और

वाइट शर्ट पहने रोड से अपने भारी भरकम चूतड़ मतकते हुए जाते दिखी,

मनोहर ने जब गाड़ी थोड़ा करीब

लाकर उन्हे देखा तभी एक लड़की  पास के सब्जी के ठेले पर रुक कर अपनी गांड खुजलाते हुए सब्जियो के भाव

पूछने लगी, मनोहर का लंड उसकी मोटी गांड को देख कर खड़ा हो गया और जब वह उसके बिल्कुल पास से गुजरा तो

उसके होश उड़ गये वह लड़की कोई और नही बल्कि उसकी अपनी बेटी संगीता थी,

संगीता 18 साल की मस्त भरे बदन

की लोंड़िया थी,

मनोहर- अरे यह तो संगीता है, पर इसकी गांड कितनी मस्त हो गई है मैने तो आज तक कभी इस पर गौर ही नही

किया,

मनोहर ने अपनी कार साइड से लगा कर अपनी बेटी की गुदाज जाँघो और उसकी गदराई गांड को अपना लंड मसल-

मसल कर देखने लगा, थोड़ी देर बाद संगीता उस लड़की के साथ आगे चलने लगी और मनोहर ने अपनी कार अपने

घर की ओर चला दी,

मनोहर की आँखो के सामने अभी तक उसकी बेटी की गदराई मोटी गांड नज़र आ रही थी और

उसका लंड पूरी तरह तना हुआ था वह जब घर पहुचा तब उसकी बहू संध्या ने दरवाजा खोला, संध्या जो कि

23 साल की मस्त लोंड़िया थी, दरवाजा खोलते ही संध्या ने अपने ससुर को देखा और जैसे ही अपना सर झुकाया अपने

ससुर के पेंट मे बने बड़े से तंबू को देख कर वह सन्न रह गई और जल्दी से दबे पाँव अपने रूम मे चली

गई,

संध्या- अरे सुनते हो तब रोहित ने उसके दूध अपने हाथो से मसल्ते हुए क्या है मेरी रानी क्यो बोखलाई हुई

हो,

संध्या- लगता है तुम्हारे पापा सुबह-सुबह किसी कुँवारी लोंड़िया की उठी हुई गांड देख कर आ रहे है जाकर

देखो उनका लंड उनके पेंट को फाड़ कर बाहर आने को बेताब है,

रोहित- क्या बक रही हो रानी बेचारे पापा के बारे मे

संध्या- तुम्हारी कसम रोहित मैने सच मैने उनका लंड खड़ा देखा है,

रोहित- अच्छा ठीक है अब खड़ा देख लिया तो क्या तुम्हारी चूत भी फूलने लगी है और फिर रोहित ने संध्या की

चूत को उसकी साडी के उपर से दबोच लिया, संध्या ने नाभि के नीचे से साडी बँधी हुई थी और रोहित उसके गुदाज पेट

को सहलाते हुए उसके मोटे-मोटे दूध को दबा कर

रोहित- संध्या कही पापा की नज़र तुम्हारे इन कसे हुए चुचो पर तो नही पड़ गई, पापा से बच के रहना तुम

नही जानती वह कितने बड़े चुड़क्कड़ है, अभी जब बुआ मम्मी के साथ बाजार से लॉट कर आएगी तब देखना पापा

का हाल,

संध्या- तुम्हारी बुआ भी तो छीनाल कितनी बड़ी रंडी लगती है हर दो महीने मे अपनी मोटी गांड उठा कर चली

आती है, कहती है बेटे को तो हॉस्टिल मे डाल दिया है और पति दुबई चला गया है अब घर मे कोई नही है तो

सोचा भैया भाभी के यहाँ थोड़ा समय गुज़ार लू,

रोहित- अब छ्चोड़ो भी और क्या तुम जब देखो कही कपड़े धोने का काम कही उन्हे उठा कर फिर जमा-जमा कर

रखने का काम तुम्हे मेरे लिए तो टाइम ही नही मिलता है

संध्या- अच्छा तुम यह कपड़े उस अलमारी मे डाल दो मैं पापा को पानी दे कर आती हू और फिर संध्या बाहर

चली जाती है,

रोहित बैठे-बैठे धोए हुए कपड़े घड़ी करने लगता है और उसकी नज़र एक गुलाबी कलर की छ्होटी सी पेंटी पर

चली जाती है, तभी संध्या रोहित के हाथ मे वह पेंटी देख लेती है,

रोहित – अरे संध्या यह छ्होटी सी पेंटी किसकी है

संध्या- मुस्कुराते हुए अब जान बुझ कर अंजान मत बनो जैसे अपनी बहन संगीता की पेंटी नही पहचानते हो

रोहित – यह संगीता की पेंटी है, कितनी छ्होटी सी है ना

संध्या- संगीता की पेंटी को थोड़ा फैला कर रोहित को दिखाते हुए लो देख लो अपनी बहन की पेंटी और सोचो

कैसी लगती होगी तुम्हारी बहन इस पेंटी मे

रोहित- मुस्कुराते हुए तुम भी ना संध्या

संध्या- रोहित का लंड उसकी लूँगी के उपर से पकड़ लेती है जो पूरी तरह तना हुआ था, क्यो यह मोटा डंडा अपनी

बहन की पेंटी देख कर इस तरह तन गया है ना, बोलो बोलो

रोहित- संगीता का मूह पकड़ कर चूमते हुए मेरी रानी लगता है तुमने पापा का लंड सचमुच खड़ा देख

लिया है तभी इतनी चुदासी हो रही हो,

संध्या-रोहित के लंड को कस कर पकड़े हुए अपनी बहन की नंगी चूत चाटने का मन कर रहा है ना तो आओ ना

मुझे ही संगीता समझ कर थोडा चोद लो

रोहित- संध्या को बेड पर लेटा कर उसकी चूत को उसकी पेंटी सरका कर चाटने लगता है

संध्या- हाय मेरे राजा अब बताओ कैसी लग रही है तुम्हे अपनी बहन की चूत और चॅटो खूब कस कर चाट लो

रोहित अपनी बीबी की चूत को खूब फैला-फैला कर चाटने लगता है और जब संध्या उसे यह कहती है कि अपनी बहन

संगीता की चूत को खूब कस-कस कर चॅटो तो वह बिल्कुल पागला हो जाता है और अपनी बीबी की चूत उसे अपनी बहन

संगीता की गुलाबी चूत नज़र आने लगती है,

रोहित और संध्या का रूम ऐसा था कि उनके बेड के पास की खिड़की से बाहर बैठक का सारा नज़ारा नज़र आता है,

तभी रोहित की मम्मी मंजू जो कि पूरी तरह भरे बदन का माल थी और 40 के उपर थी और उसके साथ रोहित की बुआ

रुक्मणी भी अंदर आ जाती है,

मंजू- भाई मैं तो थक गई और अब मुझसे बैठा नही जाएगा मैं तो जाकर थोड़ी देर लेट जाती हू

रोहित और संध्या खिड़की से बैठक का नज़ारा देख रहे थे और मंजू वहाँ से अपने रूम मे चली जाती है,

रुक्मणी अपने भाई मनोहर के पास बैठ कर उसकी जाँघो पर हाथ रख लेती है, मनोहर अपनी बहन रुक्मणी के

हाथो से बॅग लेते हुए

मनोहर- क्यो रुक्मणी क्या खरीद लाई

रुक्मणी -कुछ नही भैया भाभी कुछ कपड़े लेकर आई है

मनोहर -किसके कपड़े है,

रुक्मणी- अरे संध्या और संगीता के लिए है

मनोहर -अच्छा दिखाओ तो

रुक्मणी -अरे भैया तुम क्या करोगे देख कर उसमे मेरी ब्रा और पेंटी भी रखी है,

मनोहर- रुक्मणी के रसीले होंठो को देखते हुए तो क्या मैं तेरी पेंटी और ब्रा नही देख सकता

रुक्मणी- धीरे से अरे कही भाभी ना आ जाए और फिर रुक्मणी धीरे से अपना हाथ आगे बढ़ा कर मनोहर के

लंड को लूँगी मे हाथ डाल कर पकड़ लेती है, संध्या अपने ससुर के मोटे लंड को पकड़े देख मस्त हो जाती है

और उधर रोहित अपनी बुआ की गदराई जवानी उसका साडी के साइड से उठा हुआ पेट और बड़े-बड़े दूध देख कर उसका

लंड झटके मारने लगता है,

मनोहर- बॅग मे से पेंटी निकाल कर अपने मूह से लगा कर सूंघ लेता है

रुक्मणी- अरे भैया वह तो तुम्हारी बेटी संगीता की पेंटी है जिसे तुम सूंघ रहे हो

मनोहर- अच्छा ठीक है और फिर मनोहर दूसरी पेंटी उठा कर उसे सूंघने लगता है

रुक्मणी -अरे भैया वह तुम्हारी बहू संध्या के लिए लाए है, और तुम हो कि अपनी बहू की पेंटी को सूंघ रहे

हो,

बुआ की बात सुन कर संध्या की चूत से पानी आ जाता है जब उसका ससुर उसकी पेंटी को सुन्घ्ता है तो उसे एक पल के

लिए ऐसा लगता है जैसे पापा जी उसकी खुद की चूत को सूंघ रहे हो,

मनोहर अब अगली पेंटी सूंघ कर रुक्मणी से पूछता है क्यो बहन यह तो तुम्हारी है ना

रुक्मणी- उसके हाथ से पेंटी छिनते हुए यह मेरी और भाभी की दोनो की है

मनोहर-चौक्ते हुए दोनो की मतलब

रुक्मणी उठ कर जाते हुए मतलब यह कि मैं और भाभी एक दूसरे की बदल-बदल कर पहनती है,

मनोहर-अरे सुन तो कहाँ जा रही है देख तेरे भैया कैसे बुला रहे है तुझे और मनोहर अपने लंड को निकाल

कर रुक्मणी को दिखाता है और रुक्मणी उसे अपना अगुठा दिखाते हुए, मैं भी भाभी के साथ जाकर सोउंगी,

संध्या-हाय राम मैं ना कहती थी तुम्हारे पापा ज़रूर इस कुतिया बुआ को खूब कस कर चोद्ते होंगे

रोहित-हाँ मुझे तो यकीन नही हो रहा है कि बुआ इस तरह से पापा का लंड चूस लेगी

तभी संध्या रोहित लंड पकड़ कर हाय मेरे राजा अब यह क्यो ताव खा रहा है कही इसे अपनी बुआ के चूतड़ तो

नही पसंद आ गये है, मैं देख रही हू आज कल तुम्हारा लंड अपनी बुआ अपनी बहन और खास कर अपनी मम्मी

मंजू की मोटी गांड देख कर बड़ा जल्दी खड़ा होता है,

रोहित- उसकी चूत के अंदर अपनी एक उंगली डाल कर हिलाते हुए, लगता है मेरी रानी आज पापा का लंड देख कर बहुत

पानी छ्चोड़ रही है,

संध्या- तुम ऐसे नही मनोगे और फिर संध्या उठ कर संगीता की पेंटी पहन कर रोहित को अपनी चूत और

मोटी गांड उठा-उठा कर दिखाने लगती है और कहती है लो मेरे साजन अब देखो कैसी लगती है इस पेंटी मे

तुम्हारी जवान बहन,

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और अपनी गांड को झुका कर रोहित दिखाती हुई, लो राजा चॅटो अपनी बहना की मोटी और गुदाज

गांड को, लो राजा देख क्या रहे हो तुम जल्दी से अपनी बहन की गांड मार लो नही तो पता चला पापा ने संगीता को

चोद दिया और तुम उसकी कुँवारी चूत फाड़ने के लिए तरसते ही रह गये,

संध्या के मूह से इतना सुनना था कि रोहित ने उसकी पेंटी को उसकी गांड से साइड मे करके अपने तने लंड को अपनी

बीबी की चूत मे पीछे से एक झटके मे ही अंदर उतार दिया

संध्या बड़ी चतुर थी उसने अपना मूह उस थोड़ी सी

खुली खिड़की की ओर कर रखा था जिससे उसे पपाजी का लंड आसानी से नज़र आ जाए जिसे वह अभी भी बैठे-बैठे

सहला रहे थे, इधर रोहित अपनी आँखे बंद किए हुए संगीता की मोटी गांड को याद कर-कर के अपनी बीबी की

चूत मार रहा था, संध्या की चूत पानी-पानी तो पहले से ही थी और रोहित की मस्त चुदाई ने उसे मस्त कर दिया और

फिर दोनो पति पत्नी वही लेट गये,

शाम को मनोहर रतन के फॉर्माउस पर पहुच जाता है और रतन को वहाँ अकेला बैठा देख कर अंदर आते हुए

मनोहर-क्या हुआ रतन तू तो अकेला है वह माल कहाँ है

रतन- अरे आते ही शुरू हो गया पहले बैठ तो सही और दो घुट शराब के तो ले फिर मैं तुझे माल भी दिखा देता हू, रतन की बात सुनते ही मनोहर शराब का ग्लास उठा कर एक घुट मे ही ख़तम कर देता है और रतन मुस्कुराते हुए फिर से एक लार्ज ग्लास बना कर उसे थमा देता है, दूसरा ग्लास ख़तम करने के बाद मनोहर सिगरेट सुलगाते हुए,

मनोहर- हाँ तो मेरे दोस्त अब बता कहाँ है वह रसीला माल,

रतन- अच्छा एक बात बता सुबह तू मेरी बेटी को चोदने की नज़र से देख रहा था ना

मनोहर- एक दम से होश मे आते हुए, अबे मुझे क्या पता था कि वह तेरी बेटी है, मेरी जगह तू भी होता तो उस समय तेरा लंड खड़ा नही होता क्या,

रतन- बात तो तू सही कह रहा है, अच्छा तेरी भी एक जवान और खूबसूरत बेटी है ना

मनोहर- हाँ वह बहुत मस्त है 18 बरस की हो गई है और आज तो जानता है क्या हुआ मैने उसे रोड पर जब जाते हुए देखा तो मेरी नज़र उसके भारी चूतादो पर पड़ी और मैं पहले तो पहचान नही पाया और जब पास जाकर देखा तो पता चला मेरी बेटी है,

रतन- अच्छा एक बात पुंच्छू

मनोहर- ग्लास ख़तम करके हाँ हाँ पुंछ

रतन- अगर मेरी बेटी जिसे सुबह तूने देखा था वह तुझे चोदने को मिल जाए तो

मनोहर -अबे तू क्या बोल रहा है

रतन- पहले बता तू क्या कीमत दे सकता है

मनोहर- तू जो कहे

रतन- तो ठीक है मेहता से मुझे वह ज़मीन दिलवा दे और मैं तुझे अपनी बेटी के साथ मस्ती करने के लिए दे देता हू,

मनोहर- एक पल सोचते हुए, हस कर साले तू मज़ाक कर रहा है

रतन- अच्छा तुझे यकीन नही होता और फिर रतन एक आवाज़ लगा कर सपना को बुला लेता है

उसकी बेटी सपना जैसे ही उसके करीब आती है मनोहर उसे देख कर मस्त हो जाता है, सपना केवल ब्रा और पेंटी मे आकर अपने पापा रतन की गोद मे बैठ जाती है और रतन बड़े प्यार से उसके कसे हुए दूध को दबाने लगता है

रतन- बेटी ज़रा अंकल को अपनी पेंटी साइड मे करके अपनी गुलाबी चूत के दर्शन तो कर्वाओ

सपना अपने पापा की गोद मे अपनी दोनो टांगो को मनोहर की ओर करके फैला लेती है और फिर अपनी पेंटी सरका कर उसे अपनी गुलाबी और चिकनी चूत खोल कर दिखा देती है, मनोहर अपने लंड को मसल्ते हुए अपना मूह फाडे सपना की चूत को देखता रहता है,

रतन- यार मनोहर अब तो तुम्हारी खुद की बेटी भी चोदने लायक हो गई होगी ना

मनोहर- अपने लंड को मसल्ते हुए बिल्कुल मस्त लोंड़िया हो गई है रतन मेरी बेटी तो उसकी गदराई गांड पूरी तरह तुम्हारी बेटी सपना की गांड जैसी नज़र आती है,

रतन- तुमने कभी अपनी बेटी की गांड को इस तरह फैला कर उसकी कसी हुई गुदा देखी है और फिर रतन सपना की पेंटी के साइड से उसकी गुदा को फैला कर जब मनोहर को दिखाता है तो वह मस्त हो जाता है सपना अपने पापा के उपर दोनो तरफ पेर करके चिपक कर बैठी थी और रतन उसकी गुदा को खोल कर मनोहर को दिखा रहा था,

रतन- अब बोलो मनोहर अगर तुम्हे अपनी बेटी की गांड इस तरह से देखने को मिले तो क्या करोगे

मनोहर -सीधे अपनी जीभ उसकी गुदा मे डाल दूँगा रतन

रतन- तो फिर अभी मेरी बेटी की गुदा अपने मूह से सहलाना चाहते हो

मनोहर-हाँ मेरे यार हाँ

रतन- तो ठीक है लेकिन याद रहे मुझे मेहता की ज़मीन चाहिए

मनोहर- तू फिकर ना कर समझ ले ज़मीन तेरी हुई और बस फिर क्या था मनोहर उठ कर सपना की मोटी गांड की गहरी दरार मे अपनी जीभ डाल देता है

रतन- वहाँ से उठ कर सपना बेटी अंकल को फुल एंजाय कर्वाओ उन्होने तुम्हे बहुत मस्त गिफ्ट दिया है

सपना- आप फिकर ना करो पापा आज मैं मनोहर अंकल को इतना मस्त कर दूँगी की वह जाते ही अपनी बेटी को पूरी नंगी करके अपनी बाँहो मे भर लेंगे,

रतन वहाँ से उठ कर चला जाता है और सपना सोफे पर घोड़ी बनी रहती है और रतन उसकी गुलाबी चूत और गुदाज गांड को अपनी जीभ से खूब कस-कस कर चाटने लगता है तभी सपना सीधी होकर मनोहर का मूह पकड़ कर अपने होंठो से लगाती हुई,

सपना-अंकल सबसे पहले यह बताओ आपकी बेटी का नाम क्या है

मनोहर- संगीता

सपना- बहुत मस्त माल है क्या वह

मनोहर- बहुत कस हुआ माल है बेटी बिल्कुल तेरी तरह

सपना- तो ठीक है अब आप यह समझ लो कि आपकी बाँहो मे आपकी बेटी संगीता है और मुझे संगीता कह-कह कर चोदिये मैं भी आपको पापा कह कर अपनी चूत आपको चुसाती हू

मनोहर उसकी बात सुन कर उसे बाँहो मे भर लेता है और सपना उसके लंड को बाहर निकाल कर अपने हाथ से दबोचने लगती है,

मनोहर- पूरी तरह मस्ती मे आ जाता है और ओह संगीता बेटी चूस ज़ोर से चूस बेटी अपने पापा का मोटा लंड आह आह आह, उधर सपना मनोहर के लंड को खूब कस-कस कर दबोचते हुए चूसने लगती है,

मनोहर से सहन नही होता और वह सपना की दोनो जाँघो को खोल कर अपना मोटा लंड उसकी चूत से भिड़ा कर एक कस कर धक्का मारता है और उसका आधा लंड सपना की चूत मे समा जाता है और सपना हाय पापा मर गई रे आह फाड़ दी पापा आपने अपनी बेटी की चूत आह आह, मनोहर एक दूसरा धक्का मार कर अपने लंड को पूरा जड़ तक उतार देता है,

अब मनोहर खूब ज़ोर-ज़ोर से सपना की मस्त चूत की ठुकाई शुरू कर देता है वह सपना को चोद्ते हुए उसके मोटे-मोटे कसे हुए दूध को अपने हाथो से खूब मसल्ने लगता है और सपना भी अपनी चूत उठा-उठा कर मनोहर के लंड पर मारने लगती है, मनोहर उस रात सपना को खूब तबीयत से चोद्ता है और सपना भी मनोहर का लंड लेकर मस्त हो जाती है,

अगले दिन मनोहर मेहता से वह ज़मीन रतन को बेचने की सलाह देता है और मेहता मनोहर को यह कह कर हामी भर देता है कि आप कह रहे है तो मुझे कोई हर्ज नही है, रतन वह ज़मीन पाकर मनोहर पर बहुत खुस होता है,

अगले दिन मनोहर सुबह-सुबह पेपर पढ़ रहा था और तभी दरवाजे की बेल बजती है और मनोहर उठ कर दरवाजा खोलने जाता है और जैसे ही दरवाजा खोलता है और अपने सामने खड़ी सपना को देख कर एक दम से उसके होश उड़ जाते है,

मनोहर- अरे बेटी तुम यहाँ

सपना- वही तो मैं भी सोच रही हू अंकल आप यहाँ यह तो मेरी दोस्त संगीता का घर है और फिर सपना एक दम से मुस्कुराते हुए, ओह अब समझी, मेरी दोस्त संगीता ही आपकी बेटी है, डॉन’ट वरी अंकल, अब खड़े ही रहेगे या मुझे अंदर आने को भी कहेगे,

मनोहर- आओ बेटी आओ पर कोई भी बात करने से पहले मुझसे एक बार डिसकस ज़रूर कर लेना,

सपना- आप बेफ़िक्रा रहिए सर, सपना आपकी सारी मनोकामनाए पूर्ण करेगी, आपने जो गिफ्ट मे हमे ज़मीन दी है उसकी कीमत सपना ज़रूर आपको फुल मज़ा देकर चुकाएगी, और अब मेरा अगला मिशन बस यही होगा कि आप जिसको चाहते है वह आपकी बाँहो मे हो,

मनोहर सपना को बड़े गौर से देखता ही रह गया और सपना संगीता के रूम मे चली गई,

संगीता- अरे सपना तू क्या बात है आज सुबह-सुबह मेरी याद कैसे आ गई

सपना- आज मैं तुझे मस्त करने के मूड से आई हू और फिर सपना संगीता की स्कर्ट मे हाथ डाल कर उसकी चूत को अपने हाथो से पकड़ कर मसल देती है,

संगीता-मुस्कुराते हुए अरे तू पागल हो गई है या सुबह-सुबह तूने कोई मोटा लंड देख लिया है

सपना- मेरी रानी खूब तगड़ा लंड देखा भी है और लिया भी है और अगर तुझे बता दू कि किसका मोटा लंड अपनी चूत मे लिया है तो तू मुझसे बिल्कुल वैसे ही जलमरेगी जैसे कोई अपनी सौतन से जलता है,

संगीता -अच्छा ऐसा किसका लंड ले लिया तूने

सपना- अपना कान इधर ला मैं धीरे से तुझे बता देती हू

संगीता अपना कान सपना के मूह के पास लाती है और सपना उसके कान मे कहती है तेरे पापा मनोहर का लंड लिया है मैने,

संगीता- हट झूठी कही की, मैं ही मिली हू तुझे सुबह-सुबह

सपना- संगीता के मोटे-मोटे दूध को अपने हाथो मे भर कर दबाते हुए तेरे दूध की कसम मेरी रानी कल तेरे पापा ने मुझे खूब हुमच-हुमच कर चोदा है, और फिर सपना संगीता को सारी बात बता देती है,

संगीता- आह थोड़ा धीरे दबा ना सपना तू तो मेरी जान निकालने पर तुली है, और फिर संगीता भी सपना की एक चुचि को अपनी मुट्ठी मे भर कर मसल देती है,

सपना- मेरी रानी मैं तो बहुत धीरे दबा रही हू पर जब तेरे पापा का लंड पीछे से मेरी चूत को खोल-खोल कर भीतर घुस रहा था और वह तब जिस तरह से मेरे मोटे-मोटे चुचे मसल रहे थे अगर उस तरह से तेरे पापा तेरे इन चुचो को मसल दे तो तू मस्त होकर उनके मूह मे अपनी चूत रख देगी,

सबगीता- क्या पापा का लंड बहुत मोटा है

सपना- तू खुद ही देख लेना मैने तो अभी तक इतना तगड़ा लंड कभी नही खाया

संगीता- मूह बनाते हुए मैं कैसे देख पाउन्गि

संगीता- अरे मेरी जान यही तो खूसखबरी है तेरे लिए कि तेरे पापा ने जब मुझको चोदा था तब जानती है वह मुझे क्या समझ कर चोद रहे थे,

संगीता- क्या समझ कर

सपना- तेरे पापा मुझे बार-बार संगीता बेटी कह कर मेरी चूत मार रहे थे, और फिर सपना ने संगीता की चूत मे एक उंगली डाल कर दबाते हुए सच मेरी जान तेरे पापा तुझे नंगी करके खूब कस-कस कर चोदना चाहते है, अब तू फिकर ना कर जल्दी ही तेरी चूत को भी तेरे पापा ज़रूर चोदेन्गे,

संगीता- अपने हाथो से अपनी चूचियाँ दबाते हुए, तू सच कह रही है सपना क्या सचमुच पापा तुझसे कह रहे थे कि वह अपनी बेटी संगीता को चोदना चाहते है

सपना- हाँ मेरी रानी और तो और उनका लंड भी तेरे नाम पर बहुत झटके मार रहा था

संगीता- पर एक बात समझ मे नही आई की तूने पापा से कैसे चुदवा लिया और तू उनके पास पहुचि कैसे

सपना – मेरी रानी यह सब मत पुच्छ यह सब बिज़्नेस की बाते है कभी मोका लगा तो बताउन्गि

सपना- अब मैं जा रही हू मैं तो तुझे यही सब बताने आई थी

संगीता- वह तो ठीक है पर तू इतनी जल्दी कहाँ जा रही है

सपना- अरे मेरे पापा का फोन आया था उन्हे मुझसे कुछ काम है, उसके बाद सपना वहाँ से चली जाती है

सपना के जाने के बाद मनोहर भी सपना के पीछे-पीछे घर के बाहर चल देता है और यह सब नज़ारा बहुत देर से संध्या अपने रूम से देख रही थी, वह उठ कर संगीता के रूम मे जाती है और जैसे ही अंदर घुसती है उसे देख कर संगीता जल्दी से अपनी पेंटी के अंदर से अपने हाथ को बाहर निकाल लेती है,

संध्या- अरे मेरी बन्नो रानी सहलाओ-सहलाओ अपनी इस कुँवारी चूत को लेकिन मुझे भी तो पता चले कि मेरी गुड़िया रानी किसके लंड की कल्पना करके यह सब कर रही है,

संगीता- तुम भी ना भाभी जब देखो मज़ाक

संध्या- अच्छा मैं मज़ाक कर रही हू तो मेरे सर पे हाथ रख के कसम खा कि तू बिना किस के लंड को सोच कर अपनी चूत सहला रही थी

मनोहर- आओ बेटी हमारी गोद मे आकर बैठो,

संगीता धीरे से अपने पापा की गोद मे बैठ जाती है अपनी बेटी के गदराए हुए भारी चुतडो का भार सीधे मनोहर के लंड पर पड़ता है और वह तुरंत अपने हाथो को अपनी बेटी के दूध पर धीरे से  रख लेता है इतने मे संध्या दरवाजा खोल कर बाहर आ जाती है और मनोहर एक दम से संगीता को पास मे बैठा देता है,

इस बार संध्या का चेहरा थोड़ा लाल था और उसने अपने ससुर को कोई घुघाट भी नही किया था और फिर एक दम से घुघाट करने का नाटक करते हुए,

संध्या- संगीता ज़रा यहाँ आना और पलट कर संध्या वापस अपने रूम मे चली जाती है

संगीता उठ कर अपने भैया के कमरे मे जाती है और संध्या उसके पास आकर क्यो री वहाँ क्या कर रही थी

बैठी-बैठी मेरे पास नही आ सकती कि थोड़ा टाइम पास हो जाए,

संगीता- अरे नही भाभी वो तो पापा से बात करने लगी नही तो मैं आ आपके पास ही रही थी,

संगीता- भैया कहाँ है

संध्या- उन्होने जब से तुझे नंगी देखा है बस तुझे ही चोदने के सपने देखा करते है,

संगीता- तुम भी ना भाभी

संध्या संगीता का गाल चूमते हुए, मेरी रानी तेरे भैया का बड़ा मस्त है एक बार ले कर देख मस्त हो जाएगी

मैं तो जब भी मोका मिलता है तेरे भैया के लंड पर चढ़ कर अपनी चूत मरा लेती हू, सच रानी एक बार अपने

भैया का लोड्‍ा अपनी इस मस्त चूत मे लेकर देख मस्त हो जाएगी,

इसके बाद संध्या ने सीधे अपने हाथ को संगीता की चूत मे डाल दिया और उसकी चूत को कस कर अपने हाथो मे

दबोचते हुए उसके होंठो को चूम लिया,

संगीता- आह-आह यह क्या कर रही हो भाभी

संध्या- मेरी रानी मैं वही कर रही हू जो तेरे भैया तेरे साथ करना चाहते है, और फिर संध्या ने संगीता की

चूत को वही बैठ कर चूसना शुरू कर दिया और संगीता एक दम से पागल हो गई उसने अपनी टाँगे अच्छे से

फैला ली और संध्या उसकी चूत को चाटने लगी, तभी पीछे से रोहित आया और उसने संगीता के मोटे-मोटे दूध को

अपने हाथो मे भर कर उसके होंठो को अपने होंठो से चूसना शुरू कर दिया, रोहित जब संगीता के दूध

दबा रहा था तो उसे वह बड़े कठोर और बड़े नज़र आ रहे थे,

वही संध्या ने संगीता की चूत को इस कदर

चाटना शुरू किया कि वह मस्त हो गई और तड़पने लगी,

बाहर मनोहर अकेला बैठा सोच रहा था कि संगीता कब बाहर आएगी

संध्या और रोहित ने संगीता को उठा कर बेड पर पूरी नंगी करके लेटा दिया उसके बाद रोहित और संध्या भी पूरे

नंगे हो गये और दोनो बिस्तेर पर नंगी पड़ी संध्या से चिपक गये,

अपने बदन से इस तरह दो नंगे जिस्म के चिपक जाने से संगीता की चूत से पानी बाहर आने लगा उसके चूतड़

इधर उधर मटकने लगे, रोहित ने संगीता के चुचो को अपने मूह मे भर कर दबाना शुरू कर दिया और

संध्या संगीता के होंठ चूसने मे लगी हुई थी

तभी रोहित ने अपनी बहन की चूत को अपनी मुट्ठी मे भर कर

भींच दिया संध्या एक दम से तड़प उठी तभी रोहित उठा और उसने संगीता की दोनो मोटी जाँघो को अपने मूह से

चूमते हुए चोडा कर दिया और फिर रोहित ने अपने लंड को अपनी बहन की चूत मे लगा कर एक ज़ोर का धक्का दिया

और उसका लंड संगीता की चूत को खोलता हुआ पूरा अंदर तक समा जाता है, दूसरा झटका मारते ही वह और गहराई

मे उतर जाता है और संगीता के मूह से गु-गु की आवाज़ भर निकल पा रही थी क्यो कि उसके होंठो से अपने होंठ

लगाए हुए संध्या बराबर उसके ठोस उभारो को मसल्ति जा रही थी,

रोहित तब तक 10-12 धक्के जमा चुका था और उसका लंड अब उसकी बहन की चूत मे अच्छी तरह फिसल रहा था

संगीता भी धीरे-धीरे मस्ताने लगी थी और फिर कुछ धक्को के बाद संगीता ने अपने भैया की कमर मे अपनी

टाँगे लपेट कर ओह भैया चोदो, ओह भैया और चोदो, खूब चोदो, कस-कस कर चोदो आह आह आह ओह

रोहित यह सुनते ही अपनी प्यारी बहना की चूत मे अपने लंड को खूब कस-कस कर ठोकने लगा संगीता पूरी मस्ती

मे अपने भारी चूतादो को उपर की ओर उछाल रही थी, पूरे कमरे मे ठप-ठप की आवाज़े गूँज रही थी संध्या

ने संगीता की चुचियो को अपने मूह मे ले लिया और संगीता ने एक दम से संध्या की

चूत मे अपना हाथ डाल कर

उसकी चूत को दबोच लिया संध्या के मूह से एक सिसकारी सी निकल गई,

रोहित अपनी रफ़्तार मे धक्के मारे जा रहा था और संगीता अब च्छुटने की स्थिति मे लग रही थी, तभी रोहित ने एक

करारा धक्का उसकी चूत मे मार दिया और उसका पानी उसकी बहन की मस्त चूत मे गहराई तक उतर गया,

कुछ देर पड़े रहने के बाद रोहित उठा और उसने संध्या के होंठो को चूमते हुए उससे कहा, डार्लिंग तुम्हारा

जवाब नही तुम वाकई मे ग्रेट हो,

संध्या ने संगीता के सर पर हाथ फेरते हुए कहा रानी अभी तो यह प्रॅक्टिकल था बाकी का काम समय आने पर

करेगे , संगीता मुस्कुरा दी उसके बाद रोहित संगीता के पास जाकर उसके होंठो को चूमते हुए, वाह मेरी रानी

बहना बहुत मज़ा दिया तुमने,

सभी अपने कपड़े पहन कर रेडी हो जाते है उसके बाद संगीता बाहर आकर पापा के पास बैठ जाती है और

संध्या पापा के लिए चाइ बना कर ले आती है,

उधर मंजू और रुक्मणी फिर से तैयार होकर बाहर जाने के लिए बैठक रूम मे आती है और

मनोहर- अरे तुम दोनो फिर कहाँ चल दी और बड़ा मेकप भी किया हुआ है, रोहित बाहर से आती आवाज़ सुनकर

अपनी खिड़की को थोडा सा खोल कर बाहर झाँकता है तो देखता है कि उसकी मा मंजू और बुआ मस्त चोदने लायक

माल लग रही थी, दोनो ने अपनी गांड तक कुर्ता और बिल्कुल चुस्त सलवार फसा रखी थी और दोनो की मोटी गुदाज

जंघे और भारी-भारी गांड रोहित की तरफ थी, रोहित देख रहा था कि उसके पापा मनोहर भी उसकी बुआ रुक्मणी के

फैले हुए मोटे चूतादो को बड़ी ललचाई नज़ारो से देख रहे थे, और जब दोनो घर के बाहर जाने लगी तब

मनोहर अपना लंड सहलाते हुए अपनी बहन रुक्मणी की मोटी गांड को खा जाने वाली नज़रो से देख रहा था,

तभी रोहित रूम से बाहर आता है और

रोहित- संगीता मैं बाजार तक जा रहा हू कुछ काम तो नही है

संगीता- भैया मुझे तो कोई काम नही है किचन मे भाभी से पुंछ लो

रोहित- किचन मे जाता है और संध्या की मोटी गांड को उसकी साडी के उपर से सहलाते हुए मेरी रानी कुछ लाना तो

नही है मैं अभी थोड़ी देर मे घूम कर आता हू,

संध्या पलट कर रोहित का लंड पकड़ कर दबाते हुए, मुझे पता है आप कहाँ जा रहे है, यह मुआ ऐसे ही

थोड़ी खड़ा हो गया है उन दोनो रंडियो को आप ने बाहर चूड़ीदार सलवार पहने जाते देखा है और उस सलवार

मे तो उन दोनो रंडियो के भारी चूतादो को देख कर तो अच्छे-अच्छे का पानी छूट जाता है, अपनी मम्मी और

बुआ की मोटी गांड सूंघते हुए उनके पीछे-पीछे चल दिए ना,

रोहित- संध्या की मोटी गांड को अपने हाथो से दबोचते हुए सच संध्या एक बार मैं बुआ और मम्मी को भी

पूरी नंगी करके चोदना चाहता हू,

संध्या- रोहित के लंड के टोपे को खोल कर सहलाती हुई, मुझे पता है तुम्हे अपनी बुआ और मम्मी की मोटी गांड

बहुत पसंद है और खास कर तुम्हे अपनी मम्मी की मोटी गांड को खूब फैला कर चाटने और खूब कस कर

चोदने का बड़ा मन करता है, पर तुम फिकर ना करो जब तुम मेरी हर बात मानते हो तो मैं क्या अपने पति को उसकी

मम्मी की मोटी गांड को चुदवाने मई उसकी मदद नही कर सकती, अब जाओ नही तो मम्मी और बुआ दूर निकल

जाएगी,

रोहित तुरंत वहाँ से बाहर आता है तभी मनोहर उसे बुला कर

मनोहर-रोहित बेटे तुम संध्या का खास ख्याल रखा करो वह हमारे घर मे एक तरह से नई ही है और ये लो

कुछ पैसे और उसकी ज़रूरत का समान लेते आना और हाँ उससे कहो ज़रूरी नही है की वह दिन भर साडी मे ही रहे

उसके लिए कुछ अच्छे जीन्स वग़ैरह ले आओ, वैसे भी हमारे घर मे पर्दे की ज़रूरत नही है और फिर वह भी

तो संगीता की तरह मेरी बेटी है

रोहित- जी पापा मैं समझ गया, मैं अभी संध्या को जा कर बोलता हू और फिर रोहित संध्या के पास जाकर

रोहित- जानेमन तुमने पापा की बात तो सुनी होगी अब जाओ अपने कपड़े चेंज करके उन्हे भी अपना जलवा दिखा दो

रोहित बाहर आकर तेज-तेज चल देता है तभी उसे कुछ आगे उसकी मम्मी मंजू और बुआ रुक्मणी नज़र आती है

दोनो रंडिया अपने भारी चूतादो को मटकाती हुई जा रही थी रोहित पीछे-पीछे थोड़ी दूरी बना कर अपनी मम्मी की

मोटी गांड और बुआ की मोटी गांड को अपने लंड को दबाते हुए देख रहा था, तभी बुआ की नज़र रोहित पर पड़ जाती

है और वह अपनी भाभी से कहती है

बुआ- देख दीदी तेरा बेटा कैसे तेरी मोटी गांड को घूरता हुआ किसी टूटटू की तरह अपनी मा की गांड के पीछे लगा हुआ

चला आ रहा है

मंजू- मुस्कुराते हुए अरे वह तेरे चूतादो को देख रहा है,

बुआ- अरे नही दीदी वह तेरे चूतादो को घूर रहा है

मंजू- वह मेरा बेटा है वह तेरे और मेरे दोनो के चूतादो को घूर रहा है

तभी मंजू मुस्कुराते हुए चलते-चलते अपनी गांड के छेद को अपने हाथ से मसल्ते हुए चलने लगती है

और रोहित सोचता है कि मम्मी की मोटी गांड की गुदा मे खूब मीठी-मीठी खुजली हो रही है तभी इतना ज़ोर से अपनी

गांड खुज़ला रही है,

तभी मंजू और बुआ दोनो नीचे सब्जियो की दुकान पर झुक कर भाव-ताव करने लगी उनके

झुके होने से उनकी सलवार पूरी तरह उन दोनो के भारी चूतादो से चिपकी हुई थी और दोनो की पेंटी उनकी सलवार से

साफ नज़र आ रही थी, रोहित का लंड अपनी मम्मी और बुआ की मोटी कसी हुई गुदाज जाँघ और मोटी-मोटी गांड देख

कर पूरी तरह तन गया वह अपने लंड को मसल ही रहा था तभी सब्जी वाले की नज़र रोहित पर पड़ गई कि वह इन

दोनो औरतो के भारी चूतादो को घूर रहा है और रोहित वहाँ से चुपचाप चल देता है,

उधर मनोहर की गोद मे चढ़ते हुए संगीता अपने पापा के गालो को चूमते हुए

संगीता- पापा कभी हमे कही बाहर घुमाने भी ले जाया करो ना घर मे बोर हो जाते है

मनोहर की लूँगी के नीचे उसका लंड अपनी बेटी की गुदाज गांड से पूरी तरह दबा हुआ था और मनोहर ने अपनी बेटी

के भारी चूतादो को थोड़ा उठा कर अपने लंड को अड्जस्ट करके सीधे संगीता की चूत से टिका दिया अपने पापा का

लंड अपनी गांड चूत मे चुभने से संगीता एक दम से अपने पापा से चिपक जाती है और मनोहर अपनी बेटी की

मोटी कसी हुई चुचियो को अपने हाथो मे भर कर दबाने लगता है,

तभी संध्या एक मस्त जीन्स और छ्होटी सी

टीशर्ट पहन कर जब बाहर आती है तो मनोहर अपनी बहू की मदमस्त गदराई जवानी देख कर संगीता के दूध

को कस कर मसल देता है और संगीता आह करके अपनी भाभी को देखने लगती है संध्या ने बिना ब्रा के एक

छ्होटी सी टीशर्ट पहन रखी थी जिससे उसके मोटे-मोटे दूध पूरी तरह साफ नज़र आ रहे थे,

मनोहर का लंड अपनी बहू के गदराए जिस्म को देख कर झटके मार रहा था तभी संगीता ने कहा वाह भाभी

आप तो मस्त लग रही हो ज़रा पीछे घूम कर दिखाओ और जब संध्या पीछे घूमी तो अपनी बहू के भारी भरकम

चुतडो को जीन्स मे उठा हुआ देख कर मनोहर के मूह से पानी आ गया उसने कहा

मनोहर -वाह बहू तुम तो बहुत खूबसूरत और जवान लगती हो जीन्स मे बेटी आज से ऐसे ही कपड़े पहना करो

आख़िर संगीता और तुझमे फ़र्क ही क्या है तुम दोनो ही मेरी बेटी हो और फिर मनोहर ने संगीता से कहा बेटी जाओ

तुम भी ऐसी ही जीन्स और टॉप पहन कर आओ मैं देखना चाहता हू कि मेरी दोनो बेटियाँ एक जैसे कपड़े मे कैसी लगती है

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