बॉस की बेटी की दमदार चुदाई- XXX Story in Hindi

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मैं कॉलेज के अंतिम वर्ष में था उसी दौरान मेरे पिताजी की जॉब छूट गई और वह घर पर ही रहने लगे उनका स्वास्थ्य ठीक नहीं रहता था इसलिए घर की स्थिति और खराब होने लगी थी। मैं अपना कॉलेज पूरा होते ही जॉब की तलाश करना चाहता था लेकिन अभी मेरा कॉलेज पूरा नहीं हुआ था।

एक दिन मेरी मां ने मुझे कहा कि बेटा घर की स्थिति बिल्कुल भी ठीक नहीं है मैंने मां से कहा मां यदि आपको ऐसा लगता है तो मैं इसमें जरूर कुछ ना कुछ करूंगा।

मैंने अब नौकरी की तलाश शुरू कर दी मेरे साथ पढ़ने वाला मेरा दोस्त गौतम उसके पिताजी की जान पहचान बहुत अच्छी थी इसलिए मैंने गौतम से कहा कि मुझे नौकरी की जरूरत है गौतम ने मुझे कहा कि मैं तुम्हें अपने पिताजी से मिलाता हूं। गौतम ने मुझे जब अपने पिताजी से मिलाया तो वह मुझे कहने लगे की बेटा बताओ तुम्हें क्या जरूरत है।

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मैंने उन्हें कहा अंकल मेरे पिताजी की तबीयत ठीक नहीं रहती है और घर में कमाने वाले सिर्फ वही थी लेकिन उनकी नौकरी छूट जाने के बाद मेरे ऊपर ही घ की सारी जिम्मेदारियां आन पड़ी हैं। वह मुझे कहने लगे कि बेटा तुम इसकी बिल्कुल भी चिंता मत करो मैं जरूर कोई ना कोई रास्ता निकाल लूंगा, उन्होंने मुझे कहा लेकिन तुम अपने कॉलेज की पढ़ाई मत छोड़ो।

गौतम के पिताजी ने मेरी काफी मदद की और उन्होंने मेरे कॉलेज की पढ़ाई पूरी करवाई, अब मेरे कॉलेज की पढ़ाई खत्म हो चुकी थी और उसके बाद उन्होंने अपने परिचित के यहां पर मुझे भेजा उनकी काफी बड़ी कंपनी है।

जब उनकी कंपनी में मैं जॉब करने लगा तो वह मेरे काम से बड़े खुश थे और गौतम के पिताजी भी अक्सर उनसे मिलने के लिए आया करते हैं जब वह ऑफिस में आते तो मुझसे जरूर मिला करते और मेरे हाल-चाल भी पूछ लिया करते।

मैं इस बात से बहुत खुश था कि अब मैं जॉब करने लगा हूं घर की आर्थिक स्थिति भी अब ठीक होने लगी थी। मैं और गौतम जब भी एक दूसरे को मिलते तो गौतम मुझसे अक्सर पूछा करता कि तुम्हारी जॉब कैसी चल रही है तो मैं उसे बताता कि मेरी जॉब अच्छी चल रही है।

सब कुछ बहुत ही अच्छे से चल रहा था और उसी दौरान एक दिन हमारे ऑफिस में हमारे बॉस का परिवार आया हुआ था जब वह हमारे ऑफिस में आये तो उस टाइम हमारे बॉस का ड्राइवर आ नहीं पाया था और जब उनके परिवार को घर छोड़ना था तो उन्होंने मुझे कहा कि रजत तुम मेरे बच्चों को कर छोड़ दो।

मैंने उनकी पत्नी और उनकी बेटी जिसकी उम्र मुझसे एक या दो वर्ष कम रही होगी उनको मैंने घर तक छोड़ा लेकिन रास्ते भर उनकी लड़की सिर्फ मेरी तरफ देखती रही क्योंकि वह मेरे साथ कार की आगे वाली सीट पर ही बैठी हुई थी।

मैंने उन लोगों को घर तक छोड़ा और उसके बाद मैं वापस ऑफिस लौट आया मैं जब ऑफिस लौटा तो मेरे बॉस को मैंने उनकी कार की चाबी दे दी और कहा सर मैंने मैडम को घर तक छोड़ दिया। उसके बाद मैं अपना काम करने लगा लेकिन उस दिन मुझे घर जल्दी जाना था तो मैंने अपने बॉस से कहा कि सर मुझे आज घर जल्दी जाना पड़ेगा।

वह कहने लगे कि ठीक है रजत तुम घर चले जाओ उन्होंने मुझे घर जाने की इजाजत दे दी और मैं घर चला गया। जब मैं घर पहुंचा तो उस दिन मेरी मां और बहन हमारे किसी रिश्तेदार के घर जाने वाले थे इसलिए वह लोग जा चुकी थी मैं पिताजी के साथ ही बैठा हुआ था मैं पिताजी से बात कर रहा था।

मैंने उनसे कहा आपकी तबीयत ठीक है ना तो वह कहने लगे कि हां रजत बेटा मेरी तबियत ठीक है मैंने उन्हें कहा आपको दवाई की जरूरत तो नहीं है तो वह कहने लगे कि नहीं अभी तो मेरे पास दवाइयां हैं। मेरे पिताजी और मैं साथ में बैठे हुए थे और बात कर रहे थे तो वह कहने लगे की बेटा मैं तुम लोगों के लिए कुछ कर ना सका।

मैंने उन्हें कहा पिताजी आपने हमारे लिए इतना कुछ तो किया है, वह बहुत ज्यादा दुखी थे और कहने लगे कि मैं आज तक तुम लोगों को कभी खुशियां दे ही नहीं पाया।

मैंने उन्हें कहा आप उसकी चिंता बिल्कुल भी मत कीजिए अब सब ठीक हो चुका है और मैं अब जॉब करने लगा हूं। उन्होंने मुझे कहा बेटा मुझे इस बात की बहुत खुशी है कि तुम अब जॉब करने लगे हो। मैं उनके साथ बहुत देर तक बैठा रहा काफी समय बाद उनसे मेरी इतनी देर तक बात हो रही थी वह भी मुझसे बात कर के खुश थे।

अगले दिन जब मैं अपने ऑफिस गया तो मैं ऑफिस का काम कर रहा था उस वक्त हमारे बॉस की लड़की भी ऑफिस आई हुई थी और वह मुझे देख रही थी मै भी उसकी तरफ देख रहा था लेकिन मुझे नहीं मालूम था कि उसके दिल में क्या चल रहा है।

मैं अपनी नजरे बार-बार बचाने की कोशिश करता क्योंकि मैं नहीं चाहता था कि यह बात हमारे बॉस को पता चले लेकिन उनकी लड़की जिसका नाम अनीता है वह अक्सर मुझे देखा करती थी। जब भी वह ऑफिस आती तो वह मुझसे बात करने की कोशिश भी करती।

एक दिन तो उसने मुझसे बात भी कर ली अनीता मुझे कहने लगी कि तुम्हारा नाम रजत है ना तो मैंने उसे कहा हां मेरा नाम रजत है। वह मुझे कहने लगी पापा तुम्हारी बहुत तारीफ करते हैं और कहते हैं कि तुम बहुत ही मेहनती हो लेकिन मुझे नहीं पता था कि अनीता तो मेरे पीछे ही पड़ चुकी है।

एक दिन मैं अपने घर के लिए लौट रहा था तो उस दिन अनीता ने मुझे कहा कि क्या तुम मेरे साथ आज कॉफी पर चल सकते हो। मैंने भी सोचा कि कुछ देर मैं अनीता के साथ बैठ जाता हूं और कुछ देर तक मैं अनीता के साथ बैठा रहा अनीता ने मुझे अपने बारे में बताया और मैं अनीता से बात करता रहा।

काफी देर हो गई थी जब हम दोनों बात कर रहे थे मैंने अनीता को कहा मुझे लगता है अब मुझे चलना चाहिए अनीता कहने लगी कि थोड़ी देर और रुक जाते तो मुझे भी अच्छा लगता मैंने भी सोचा चलो अनीता के साथ थोड़ी देर और रुक जाते हैं लेकिन अनीता की एक दोस्त भी वहां पर आ गई और अनीता और मैं साथ में बैठे हुए थे तो अनीता ने मेरा परिचय अपनी दोस्त से करवाया।

अब मुझे काफी देर हो चुकी थी और जब मैं घर पहुंचा तो मेरी मां ने मुझसे पूछा कि बेटा आज तुम बहुत देर से आ रहे हो तो मैंने अपनी मां को बताया मां कुछ जरूरी काम था इसलिए आने में देर हो गई। मैंने जब यह बात अपने दोस्त गौतम को बताई तो वह मुझे कहने लगा कि तुम तो बहुत खुश नसीब हो जो अनीता तुम्हारे पीछे पड़ी हुई है।

मैंने उसे बताया यार मुझे यह सब बिल्कुल भी पसंद नहीं है अब मैं हर रोज की तरह ऑफिस जाने लगा अनीता तो काफी दिनों तक मुझे दिखाई भी नहीं दी थी। एक दिन अनीता ऑफिस में आई हुई थी, उस दिन वह मुझे दिखी जब वह मुझे दिखी तो उसने मुझसे अपने घर चलने को कहा क्योंकि अनीता के पिताजी मेरे बॉस है इसलिए मुझे अनीता को छोड़ने के लिए घर जाना पड़ा।

अनीता को जब मैंने घर पर छोड़ा तो अनीता ने मुझे कहा कि तुम थोड़ी देर घर पर ही रुक जाओ। मैं भी अनीता के साथ रुक गया मुझे नहीं पता था कि अनीता कि दिल में क्या चल रहा है जब हम दोनों साथ में रुके तो अनीता ने मेरे सामने अपने कपड़े उतारने शुरू किए और वह नग्न अवस्था में मेरे सामने खड़ी थी।

अनीता का नंगा बदन देखकर मैं भी कहां अपने आपको रोकने वाला था मेरे लंड से पानी बाहर निकल आया था। मैंने जब अनीता को अपनी बाहों में लिया तो वह मुझे अपने बेडरूम में ले गई और वहां पर जब मैंने उसके होंठों को चूमा और थोड़ी देर बाद उसके गोल और सुडौल स्तनों को मैं अपने मुंह में लेकर चूस रहा था तो वह भी पूरी तरीके से उत्तेजित हो चुकी थी।

वह मेरे लंड को अपने मुंह में लेने के लिए बेताब बैठी हुई थी उसने मेरे लंड को जैसे ही अपने मुंह के अंदर लिया तो मुझे बहुत ही अच्छा लगा और उसके ऐसा करने से मैं पूरी तरीके से गर्म हो चुका था।

मैंने उसकी चूत को चाटना शुरू किया तो उसकी चूत पर एक भी बाल नहीं था और उसकी चूत को चाटकर बड़ा मजा आ रहा था जिस प्रकार से उसकी चूत का मजा मैने बहुत देर तक लिया उससे वह अपने आपको बिल्कुल रोक नहीं पा रही थी और जैसे ही मैंने उसकी चूत के अंदर अपनी लंड को घुसाया तो वह मुझे कहने लगी तुम अपने लंड को अंदर तक डाल दो।

मेरा लंड अनीता की चूत के अंदर तक जा चुका था जब उसकी चूत के अंदर बाहर मेरा लंड होता तो वह मुझे कसकर अपनी बाहों में जकड़ रही थी।

हम दोनों एक दूसरे का साथ बड़े अच्छे से दे रहे थे और हम दोनों ही पसीना पसीना होने लगे थे। मैंने भी पूरी ताकत के साथ उसे धक्के देने शुरू किए करीब 2 मिनट की चुदाई का आनंद लेने के तुरंत बाद ही मेरा वीर्य पतन हो गया जब मेरा वीर्य पतन हुआ तो वह मुझे कहने लगी तुम्हारा माल तो बहुत जल्दी गिर गया।

अनीता ने ना जाने पहले से कितने ही लोगों के साथ सेक्स किया था लेकिन जब उसने अपनी चूतडो को मेरे सामने किया तो मैं उसकी चूत की तरफ देख रहा था उसकी चूत से पानी निकाल रहा था।

मैंने भी अपने लंड को उसकी चूत पर दोबारा से लगा दिया और जैसे ही मैंने अपने लंड को उसकी चूत के अंदर तक डाला तो वह चिल्ला उठी और मेरा लंड उसकी चूत के अंदर तक प्रवेश हो चुका था अब मैं उसे बहुत ही तेज गति से धक्के मार रहा था। जिस प्रकार से मैं उसे धक्के मार रहा था उससे वह इतनी ज्यादा मजे में आ गई कि उसने मुझे कहा कि मै बिल्कुल भी अपने आपको रोक नहीं पा रही हूं।

वह अपनी चूतड़ों को मुझसे मिलाए जा रही थी और जिस प्रकार से मैं उसे धक्के मार रहा था उस से उसकी चूतड़ों का रंग लाल होने लगा था। वह अपने आपको बिल्कुल भी ना रोक सकी और ना ही मैं अपने आपको रोक सका मेरा वीर्य अनीता की चूत के अंदर जा चुका था। अनीता और मैंने अपने कपड़े पहन लिए थे और जब भी अनीता को मेरी जरूरत होती तो वह अपने पापा से कहलवाकर मुझे अपने साथ घर ले कर जाती और मैं उसकी चूत के पूरे मजे लिया करता।

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