हरामी देवर ने भोली भाली हॉट भाभी को चोदा | Devar Bhabhi Chudai Part -1

हरामी देवर ने भोली भाली हॉट भाभी को चोदा | Devar Bhabhi Chudai Part -1
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आगरा के पास एक गाँव लखनपुर के जमींदार दशरथ सिंह चौहान अपनी पत्नी सुनीता और दो बेटों के साथ रहते थे.
बड़ा बेटा विवेक पिता के जमींदारी और खेती बाड़ी के काम काज में अपना हाथ बंटाता था और दूसरा बेटा गौरव अभी अभी आगरा से बी कॉम की पढाई पूरी करके वापस लौटा था. जबसे गौरव अपनी पढाई पूरी करके वापस आया था, जमींदार साहब ने हिसाब किताब का काम गौरव के जिम्मे लगा दिया था और गाँव में बाहर जाकर जमींदारी और खेती बाड़ी के कामकाज के देखभाल की जिम्मेदारी बड़े बेटे विवेक को सौंप दी थी.

कहानी की शुरुआत आगरा के डिग्री कालेज से होती है जहां गौरव अपनी बी कॉम की पढाई कर रहा था और वहीं पर आगरा की ही रहने वाली एक बेहद खूबसूरत लड़की शिवानी अंग्रेजी के बी ए की पढाई कर रही थी.

शिवानी हालांकि एक बेहद मामूली मध्यम वर्ग परिवार से आती थी लेकिन वह गज़ब की खूबसूरत थी और पूरे कालेज के लड़के उसके दीवाने हुए रहते थे. लेकिन वह किसी को भी भाव नहीं देती थी. उसका इरादा किसी तरह अपनी पढाई पूरी करके किसी सरकारी नौकरी को ज्वाइन करना था ताकि वह अपने परिवार की चिंता को कुछ कम कर सके. उसकी एक छोटी बहन रवीना भी थी जो इस समय 12 वीं क्लास में पढ़ रही थी.

गौरव रोजाना अपने गान से कालेज तक अपनी बाइक से आता जाता था क्योंकि उसके गाँव से कालेज महज़ 15 किलोमीटर की दूरी पर था.

गौरव पढाई लिखे में कोई बहुत बढ़िया नहीं था और बड़ी मुश्किल से जैसे तैसे करके पास हुआ था. उसे कोई नौकरी चाकरी तो करनी नहीं थी बस पिताजी की जमींदारी के कामकाज को ही आगे बढ़ाना था लिहाज़ा उसका ध्यान पढाई लिखाई में काम और कालेज की लड़कियों पर ज्यादा लगा रहता था.

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गौरव के साथ उसके 4 दोस्त भी हर समय उसके साथ ही उसकी चापलूसी में लगे रहते थे क्योंकि गौरव जमींदार साहब का बेटा था और वह उन दोस्तों को खिलाता पिलाता रहता था -इसके बदले में वे चारों दोस्त अमित, मोहित, रोहित और पुनीत हर समय उसकी चापलूसी में लगे रहकर कालेज में आती जाती लड़कियों को यह कहकर तंग करते रहते थे कि गौरव जमींदार साहब का बेटा है- जो लड़की उससे दोस्ती करके उसकी बात मान लेगी उसकी लाइफ बन जाएगी.
कालेज में ज्यादातर लडकियां आगरा शहर की ही थीं और इसलिए वह गाँव के गौरव और उसके दोस्तों को ज्यादा भाव नहीं देती थीं.

एक दिन गौरव ने शिवानी को कालेज की कैंटीन से बहार आते हुए देखकर अपने दोस्तों से कहा : यह लड़की बहुत सेक्सी माल है और इसे मैं किसी न किसी तरह अपने चक्कर में फंसाकर ही मानूंगा

उसके चापलूस दोस्तों ने फौरन उसकी हाँ में हाँ मिलाते हुए , अपनी तरफ से गुजरती हुई शिवानी का रास्ता रोककर उससे कहा : कहाँ जा रही है मेरी जान. देख नहीं रही कि जमींदार साहब के बेटे गौरव जी को तेरी खूबसूरती भा गयी है -तू जल्दी से मान जा और उनसे दोस्ती कर ले-तेरी तो लाइफ सेट हो जाएगी

शिवानी उन लोगों की बातों को अनसुना करती हुई जैसे ही आगे बढ़ने लगी, गौरव ने आगे बढ़कर उसका हाथ पकड़ लिया और उसे अपनी तरफ खींचते हुए बोला : आजा मेरी जान चल तुझे सिनेमा दिखाने ले चलता हूँ -हाल में ही फिल्म देखते हुए हम दोनों मस्ती भी कर लेंगे.

शिवानी ने गुस्से से अपना हाथ छुड़ाया और एक थप्पड़ गौरव के गाल पर रसीद करते हुए बोली : तुम जैसे आवारा लोफर लोगों के मैं मुंह नहीं लगना चाहती-तुम्हारी इतनी हिम्मत कैसे हुई कि मुझे इसे तरह से अपनी तरफ खींचकर इतनी बेहूदगी भरी बातें करो.

गौरव के गाल पर जैसे ही शिवानी ने थपप्ड़ लगाया, वह एकदम सकते में आ गया. बड़े बाप की बिगड़ी हुई औलाद गौरव अपनी हेकड़ी में रहता था लेकिन उसे एक मामूली मिडिल क्लास फ़ैमिली की लड़की ने चार दोस्तों के सामने थपप्ड़ लगा दिया -इससे पहले कि वह इस थप्पड़ का कोई जबाब दे पाता, उसने देखा कि सामने से कालेज के प्रिंसिपल कुछ प्रोफेसरों के साथ उस तरफ ही आ रहे थे. उन सबको देखकर गौरव और उसके चारों दोस्त वहां से फटाफट रवाना हो गए और शिवानी भी वहां से चली गयी.

उस दिन के बाद से गौरव ने मन ही मन यह तय कर लिया कि किसी न किसी तरह इस घमंडी लड़की को वह अपने जाल में जरूर फँसायेगा और अपनी इस बेइज़्ज़ती का बदला लेगा.

वार्षिक परीक्षाओं के बाद कालेज की छुट्टियां हो गयीं थीं. छुट्टियों के बीच ही शिवानी और गौरव दोनों का रिजल्ट भी आ गया था और वे दोनों ही अपनी अपनी फाइनल ईयर की परीक्षा में पास हो गए थे.

एक दिन शिवानी अपने घर में बैठी हुई थी . अचानक उसने देखा कि उसके घर के आगे कोई बड़ी सी गाड़ी आकर रुकी है. शिवानी के पापा कुछ समझ पाते कि कौन आया है, उससे पहले कार में से लखनपुर के जमींदार दशरथ सिंह चौहान और उनकी पत्नी सुनीता उतरकर शिवानी के घर में आ गए.

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शिवानी के पापा ने उनका स्वागत करते हुए कुछ पूछने की कोशिश की तो उन्होंने खुद ही अपना परिचय देना शुरू कर दिया : मैं पास के गांव लखनपुर का जमींदार दशरथ सिंह चौहान और यह मेरी धर्मपत्नी सुनीता हैं. आपकी बेटी और मेरा बेटा गौरव एक ही कालेज में पढ़ते थे. बेटे ने आपकी बेटी की काफी तारीफ की है. मैं अपने बड़े बेटे विवेक के लिए आपकी सुपुत्री का हाथ मांगने आया हूँ.

शिवानी के मम्मी पापा को मानो फूले नहीं समा रहे थे. जमींदार साहब खुद उनकी लड़की का हाथ अपने बड़े बेटे के लिए मांगने आये थे. चाय नाश्ता आदि करने के बाद शिवानी की शादी की बात उसी समय तय कर दी गयी और अगले एक हफ्ते बाद का शादी का मुहूर्त भी निकालकर चट मँगनी पट ब्याह कर दिया गया और शिवानी अपने शहर से गाँव की हवेली में नयी दुल्हन बनकर आ गयी. शादी के दौरान ही उसे यह मालूम पड़ा कि जिस गौरव को उसने कालेज में थप्पड़ लगाया था, वह उसके पति विवेक का छोटा भाई और शिवानी का देवर है.

हवेली में दो मंजिलें थीं और निचली मंज़िल पर एक बड़ा सा ड्राइंग रूम और चार कमरे थे. पहली मंज़िल पर भी पांच कमरे थे.

जमींदार साहब और उनकी पत्नी निचली मंज़िल पर ही रहते थे और उनके दोनों बेटे पहली मंज़िल के एक एक कमरे में रहते थे. बाकी के कमरे आम तौर पर बंद रहते थे और किसी मेहमान के आने पर उन्हें खोला जाता था.

शिवानी और विवेक पहली मंज़िल के एक बड़े कमरे के आ गए थे. उनके कमरे से साथ वाले कमरे में गौरव रहता था.
शिवानी और विवेक की शादी हुए लगभग एक महीना हो चुका था. गौरव ने एक साज़िश के तहत शिवानी की शादी अपने बड़े भाई से करवाने के लिए अपने मम्मी पापा और बड़े भाई पर यह कहकर दबाब बनाया था कि घर में पढ़ी लिखी सुशील बहू आ जाने से घर में रौनक बढ़ जाएगी और क्योंकि शिवानी लोअर मिडिल क्लास फ़ैमिली से है, वह ज्यादा नखरे किये बिना घर के नियम कायदों को स्वीकार भी कर लेगी. सबको गौरव की यह बात जँच गयी थी और इस तरह यह शादी हो गयी थी.

शिवानी ने यहां आने के बाद यह नोटिस किया था कि जहां उसका पति विवेक काफी सौम्य और सीधा सादा है, उसका देवर गौरव उसके उलट एकदम दबंग, रौबीला और कड़क है

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एक दिन जब विवेक और उसके मम्मी पापा किसी काम से घर से बाहर गए हुए थे और हवेली में सिर्फ गौरव और शिवानी ही अकेले थे ,गौरव ने शिवानी को आवाज़ देकर अपने कमरे में बुलाया : इधर आओ शिवानी. ( गौरव हुए शिवानी लगभग एक ही आयु के थे और एक साथ कालेज में पढ़ भी चुके थे इसलिए गौरव उसे भाभी न कहकर उसके नाम से ही बुलाता था.)

शिवानी उसकी रौबीली कड़क आवाज़ को नज़रअंदाज़ नहीं कर सकी और उसके कमरे में पहुँच गयी
शिवानी को देखकर गौरव कड़क आवाज़ में उससे बोला : जाओ मेरे लिए एक ग्लास पानी लेकर आओ
शेष अगले भाग में… To be Continue…..

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